अमेरिकी मिडटर्म इलेक्शन: भारतीय मूल की डेमोक्रेट नेता प्रमिला जयपाल ने छठी बार दर्ज की जीत
भारतीय मूल की डेमोक्रेट नेता प्रमिला जयपाल, जो अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के लिए चुनी जाने वाली पहली दक्षिण एशियाई अमेरिकी महिला हैं और कांग्रेस की एकमात्र ऐसी सदस्य हैं जिनके पास कभी स्टूडेंट वीजा और एच-1बी वर्क वीजा दोनों रहे हैं, उन्होंने छठा कार्यकाल जीत लिया है।
वाशिंगटन, 4 नवंबर । भारतीय मूल की डेमोक्रेट नेता प्रमिला जयपाल, जो अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के लिए चुनी जाने वाली पहली दक्षिण एशियाई अमेरिकी महिला हैं और कांग्रेस की एकमात्र ऐसी सदस्य हैं जिनके पास कभी स्टूडेंट वीजा और एच-1बी वर्क वीजा दोनों रहे हैं, उन्होंने छठा कार्यकाल जीत लिया है।
वॉशिंगटन राज्य के 7वें कांग्रेसनल जिले में प्रमिला जयपाल ने रिपब्लिकन उम्मीदवार नीरव शेठ को बड़े अंतर से हराया। जब विजेता घोषित किया गया, तब तक करीब 54 प्रतिशत वोटों की गिनती हो चुकी थी और जयपाल को लगभग 88 प्रतिशत वोट मिले थे, जबकि नीरव शेठ को करीब 12 प्रतिशत वोट मिले थे।
इस जीत के साथ जयपाल दोबारा उस प्रतिनिधि सभा में लौटेंगी, जहां अब डेमोक्रेटिक पार्टी का नियंत्रण होगा। वह न्यायिक समिति की आव्रजन उपसमिति की वरिष्ठ डेमोक्रेट सदस्य भी हैं।
चुनाव की रात उन्होंने फ्लोरिडा से जीतने वाली पिया डंडिया का स्वागत करते हुए कहा कि वह अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में पहुंचने वाली तीसरी दक्षिण एशियाई-अमेरिकी महिला हैं। जयपाल ने इस संदर्भ में अपना और आयशा वहाब का भी उल्लेख किया।
प्रमिला जयपाल का जन्म भारत में हुआ था। उन्होंने अपना बचपन भारत, इंडोनेशिया और सिंगापुर में बिताया। 16 साल की उम्र में वह अकेले उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका चली गईं और जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया। बाद में उन्होंने नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी से एमबीए की डिग्री हासिल की।
साल 2023 में एक बयान में उन्होंने भारत को -'मेरा जन्मस्थान, जहां मेरे माता-पिता आज भी रहते हैं' बताया था। उन्होंने कहा था कि वह लगभग तीन दशक तक भारत की नागरिक रहीं।
जयपाल ने अक्सर अपने प्रवासी जीवन के अनुभव का जिक्र करते हुए ट्रंप प्रशासन की कानूनी आव्रजन (लीगल इमिग्रेशन) को सीमित करने वाली नीतियों का विरोध किया है। उन्होंने एच-1बी वीजा शुल्क को एक लाख डॉलर तक बढ़ाने जैसे कदमों की भी आलोचना की।
दिसंबर 2025 में एक संसदीय सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा था कि प्रशासन कानूनी आव्रजन के रास्ते बंद कर रहा है और यह भेदभावपूर्ण नीतियों की याद दिलाता है। उन्होंने भारतीय मूल के लोगों के खिलाफ बढ़ती नफरत की घटनाओं पर भी चिंता जताई थी। उसी सुनवाई में उन्होंने भारतीय उत्पादों पर लगाए गए टैरिफ की भी आलोचना की थी। उनका कहना था कि इससे भारत की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंच रहा है और अमेरिकी कारोबारियों तथा उपभोक्ताओं पर भी असर पड़ रहा है।
अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद जयपाल ने कहा था, "यह हिंसा पूरी तरह अस्वीकार्य है। मैं पहलगाम में हुए उस भयानक हमले की निंदा करती हूं, जिसमें निर्दोष लोगों की जान गई।"
रिकॉर्ड के अनुसार, जनवरी 2025 से सितंबर 2026 के बीच प्रतिनिधि सभा में हुई वोटिंग में उन्होंने लगभग 96 प्रतिशत मामलों में डेमोक्रेटिक पार्टी के बहुमत के साथ मतदान किया। इस दौरान वह कुछ मतदान सत्रों में अनुपस्थित भी रहीं, जिनमें ईरान, लेबनान और यूक्रेन से जुड़े कुछ प्रस्ताव शामिल थे।
जयपाल ने इस अवधि के दौरान रिपब्लिकन पार्टी के सभी प्रमुख आव्रजन विधेयकों का विरोध किया। उन्होंने 2026 और 2027 के रक्षा बजट विधेयकों, रिपब्लिकन मेल-मिलाप (रिकंसिलिएशन) बिल और जनवरी 2026 के खर्च पैकेज के खिलाफ भी वोट दिया।
वह पहले कांग्रेसनल प्रोग्रेसिव कॉकस की अध्यक्ष रह चुकी हैं और वर्तमान में उसकी मानद अध्यक्ष (चेयर एमेरिटा) हैं। इसके अलावा, वह कांग्रेसनल एशियन पैसिफिक अमेरिकन कॉकस की इमिग्रेशन टास्क फोर्स की अध्यक्ष हैं और विदेश मामलों की समिति की दक्षिण एवं मध्य एशिया उपसमिति तथा बजट समिति में भी सदस्य हैं।
जयपाल कई महत्वपूर्ण विधेयकों से जुड़ी रही हैं। उनकी वेबसाइट के अनुसार, वह मेडिकेयर फॉर ऑल एक्ट की प्रमुख प्रायोजक हैं और कॉलेज फॉर ऑल एक्ट, अल्ट्रा-मिलियनेयर टैक्स एक्ट तथा डिग्निटी फॉर डिटेन्ड इमिग्रेंट्स एक्ट जैसी पहल की भी प्रमुख समर्थक रही हैं।
Source: IANS