लेबनानी राष्ट्रपति का ईरान पर तीखा हमला, कहा- अमेरिका से बातचीत के लिए हमारा इस्तेमाल बंद हो
लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने अमेरिका के साथ बातचीत में लेबनान का इस्तेमाल 'मोल-भाव के मोहरे' के रूप में करने के लिए ईरान की कड़ी आलोचना की है। साथ ही, उन्होंने हिज्बुल्लाह के महासचिव नईम कासिम की भी आलोचना करते हुए कहा कि लेबनान के लोग युद्ध से थक चुके हैं और शांति से जीने के हकदार हैं।

बेरूत, 6 जून । लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने अमेरिका के साथ बातचीत में लेबनान का इस्तेमाल 'मोल-भाव के मोहरे' के रूप में करने के लिए ईरान की कड़ी आलोचना की है। साथ ही, उन्होंने हिज्बुल्लाह के महासचिव नईम कासिम की भी आलोचना करते हुए कहा कि लेबनान के लोग युद्ध से थक चुके हैं और शांति से जीने के हकदार हैं।
समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, औन ने सीएनएन की मुख्य इंटरनेशनल एंकर क्रिस्टियन अमनपोर को दिए एक इंटरव्यू में यह बातें कहीं। यह इंटरव्यू शुक्रवार (स्थानीय समय) को लेबनान के राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से जारी किया गया।
गुरुवार को ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने एक बयान में कहा कि अमेरिका और इजराइल के साथ 8 अप्रैल को हुए समझौते को स्वीकार करने के लिए ईरान की मुख्य शर्त लेबनान समेत सभी मोर्चों पर पूर्ण युद्धविराम थी।
इंटरव्यू में औन ने कहा, "यह आपका देश नहीं है, यह हमारा देश है। यह स्वीकार्य नहीं है कि क्षेत्रीय शक्तियां अपने हितों के लिए लेबनान का इस्तेमाल करें, जबकि आम लेबनानी नागरिक संघर्ष के कारण मौत, विस्थापन और तबाही झेलते रहें।"
लेबनान के राष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि कि लेबनान और इजराइल के बीच चल रहे संघर्ष को खत्म करने का एकमात्र व्यावहारिक तरीका बातचीत ही है। उन्होंने कहा कि लेबनान की सरकार और प्रशासन को हिज्बुल्लाह के मुद्दे का समाधान घरेलू स्तर पर करना होगा। इसके लिए समूह की सशस्त्र मौजूदगी के मूल कारणों पर ध्यान देना होगा, जिनमें लेबनानी क्षेत्रों से इजराइली वापसी और संघर्ष का अंत शामिल है।
औन ने कहा कि सभी समुदायों और क्षेत्रों के अधिकांश लेबनानी नागरिक दशकों से चले आ रहे संघर्ष से थक चुके हैं।
कासिम के बयानों पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा, "वे लेबनान के लोग हैं, न कि नईम कासिम के लोग।" कासिम ने इस समझौते का विरोध किया था और सड़क पर विरोध-प्रदर्शन के जरिए सरकार गिराने की धमकी दी थी।
इसके अलावा, शुक्रवार को दक्षिणी लेबनान में इजराइली हवाई हमलों और ड्रोन हमलों में कम से कम 13 लोग मारे गए और 15 अन्य घायल हो गए। लेबनान की नेशनल न्यूज एजेंसी (एनएनए) के अनुसार, इन हमलों में कम से कम आठ कस्बों को निशाना बनाया गया, जिनमें डुएइर, हब्बूश और बुर्ज कलाउइयाह शामिल हैं।
टायर जिले में जबल आमेल अस्पताल के पास हवाई हमले में बैंक वाली एक इमारत नष्ट हो गई और 12 आम नागरिक घायल हो गए।
वहीं, हिज्बुल्लाह ने कहा कि उसके लड़ाकों ने शकिफ (ब्यूफोर्ट) कैसल और दूसरे इलाकों के पास इजराइली सैनिकों और गाड़ियों के ठिकानों को निशाना बनाया। शुक्रवार देर रात लेबनान के पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑपरेशन्स सेंटर ने एक बयान में कहा कि जेबदीन शहर पर इजराइली हवाई हमले में पांच लोगों की मौत और दो लोग घायल हो गई। मरने वालों में एक महिला और मेडिकल स्टाफ का एक सदस्य शामिल था।
लेबनान के पब्लिक हेल्थ मिनिस्ट्री के इमरजेंसी ऑपरेशन्स सेंटर के अनुसार, 2 मार्च से इजराइली हमलों में मरने वालों की कुल संख्या 3,558 और घायल होने वालों की संख्या 10,870 हो गई है। इजराइल डिफेंस फोर्सेज (आईडीएफ) ने एक बयान में कहा कि उसने शुक्रवार को दक्षिणी लेबनान में हिज़्बुल्लाह के दो चरमपंथियों को मार गिराया।
सेना के मुताबिक, दोनों व्यक्ति 'सायेरेट गिवती' (आईडीएफ की विशेष टोही एवं स्पेशल ऑपरेशन यूनिट) के सैनिकों के साथ हुई एक पिछली मुठभेड़ में शामिल थे। उस घटना में इजरायल का एक अधिकारी गंभीर रूप से घायल हो गया था, जबकि 'सायेरेट गिवती' के कमांडर को मामूली चोटें आई थीं।
बयान में कहा गया कि बाद में आईडीएफ ने इलाके में तलाशी अभियान चलाकर घटना में शामिल दोनों व्यक्तियों का पता लगाया और उन्हें मार गिराया। साथ ही, क्षेत्र में हिज्बुल्लाह के अन्य बुनियादी ढांचों को भी निशाना बनाया गया।
Source: IANS
