अमेरिकी खुफिया एजेंसी का दावा- चीन ईरान को समर्थन देने पर कर रहा है विचार

वाशिंगटन, 12 अप्रैल। अमेरिकी मीडिया में दिए गए यूएस के खुफिया आकलन से पता चलता है कि चीन ईरान के संघर्ष में ज्यादा एक्टिव भूमिका निभाने पर विचार कर रहा है। भले ही चीन एक बड़े युद्ध से बचना चाहता हो, लेकिन वह ईरान अमेरिका संघर्ष में अपनी सक्रियता बढ़ाना चाह रहा है। 

द न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी एजेंसियों ने ईरान को चीन के संभावित समर्थन की ओर इशारा करते हुए जानकारी इकट्ठा की है। हालांकि अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि यह इंटेलिजेंस पक्की नहीं है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि "इस बात का कोई सबूत नहीं है कि लड़ाई के दौरान अमेरिकी या इजरायली सेना के खिलाफ चीनी मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया है।" इससे नतीजों के बारे में अनिश्चितता पर जोर दिया गया।

फिर भी, अमेरिकी अधिकारी बड़े जियोपॉलिटिकल दांव को देखते हुए चीन के शामिल होने की संभावना को भी अहम मानते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, चीन फिलहाल बहुत सावधानी बरत रहा है। चीन के अधिकारी दुनिया को यह दिखाना चाहते हैं कि वे इस मामले में निष्पक्ष हैं और किसी का पक्ष नहीं ले रहे। लेकिन असल में, उनके बीच ईरान की मदद करने को लेकर भी बातचीत चल रही है, जिससे उनकी स्थिति काफी उलझी हुई नजर आती है।

रिपोर्ट में कुछ पूर्व अधिकारियों ने कहा कि ईरान मिसाइलों और ड्रोन में इस्तेमाल होने वाले जरूरी पार्ट्स के लिए चीन पर निर्भर है। हालांकि, बीजिंग यह तर्क दे सकता है कि ऐसे पार्ट्स का सिविलियन इस्तेमाल होता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, माना जाता है कि चीन ने कुछ इंटेलिजेंस सपोर्ट भी दिया है, हालांकि इसकी जानकारी अभी कम है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका और ईरानी अधिकारी हफ्तों की लड़ाई के बाद एक नाजुक सीजफायर को स्थिर करने के लिए इस्लामाबाद में सीधी बातचीत कर रहे हैं।

अमेरिकी अधिकारी इस बात पर करीब से नजर रख रहे हैं कि क्या कोई बाहरी सपोर्ट बातचीत पर असर डाल सकता है या जमीनी स्तर पर संतुलन बदल सकता है।

विश्लेषकों का कहना है कि बीजिंग का तरीका सोच-समझकर किया गया कैलकुलेशन दिखाता है। चीन के ईरान के साथ गहरे आर्थिक संबंध हैं और वह उसका सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता है, लेकिन उसके पास वैश्विक व्यापार में रुकावट डालने वाली बातों से बचने के लिए मजबूत फायदे भी हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि मिसाइल भेजने को लेकर चीन के अंदर चल रही बहस इन हितों के बीच तनाव को दिखाती है।

साथ ही, बीजिंग के पब्लिक रवैये ने संयम पर जोर दिया है। चीनी अधिकारियों ने एक न्यूट्रल प्लेयर के तौर पर अपनी इमेज बचाने की कोशिश की है, खासकर जब वे मिडिल ईस्ट में कूटनीतिक और आर्थिक जुड़ाव बढ़ा रहे हैं।

Source: IANS

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