पश्चिम एशिया और यूक्रेन पर बातचीत: विदेश मंत्री जयशंकर की यूएन चीफ गुटेरेस से हुई मुलाकात

संयुक्त राष्ट्र, 14 जुलाई । विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से मुलाकात की। इस दौरान दोनों ने दुनिया की अहम घटनाओं पर चर्चा की, जिसमें पश्चिम एशिया, यूक्रेन और सूडान में चल रहे संघर्ष शामिल थे। साथ ही भारत ने 2028-2029 के कार्यकाल के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में अस्थायी सीट के लिए अपना अभियान औपचारिक रूप से शुरू किया।

यह हाई-लेवल मीटिंग संयुक्त राष्ट्र हेडक्वार्टर में भारत के यूएनएससी अभियान की शुरुआत के दौरान हुई। यह मीटिंग अगले साल होने वाले चुनाव से पहले संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों का समर्थन हासिल करने के लिए नई दिल्ली की डिप्लोमैटिक कोशिशों की शुरुआत थी।

जयशंकर ने एक्स पर मीटिंग की जानकारी देते हुए लिखा, "आज न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र के सेक्रेटरी जनरल एंटोनियो गुटेरेस से मिलकर खुशी हुई। वेस्ट एशिया, यूक्रेन और सूडान समेत दुनिया भर की घटनाओं पर चर्चा हुई। साथ ही, भारत और संयुक्त राष्ट्र के बीच सहयोग की मजबूती को भी सराहा गया।"

बातचीत मुख्य रूप से गंभीर अंतरराष्ट्रीय संकटों और कई वैश्विक मुद्दों पर भारत और संयुक्त राष्ट्र के बीच लगातार सहयोग पर केंद्रित रही।

इससे पहले दिन में विदेश मंत्री जयशंकर ने सुरक्षा परिषद में भारत की उम्मीदवारी को औपचारिक रूप से पेश किया। इसके लिए उन्होंने 'शांति' पर आधारित छह-सूत्रीय विज़न (दृष्टिकोण) प्रस्तुत किया, जिसका अर्थ है -नियमों, भरोसे और ईमानदारी के जरिए सर्वांगीण प्रगति सुनिश्चित करना।

दुनिया भर से आए राजनयिकों और प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि भारत सुरक्षा परिषद में 'ग्लोबल साउथ' (विकासशील देशों) की आवाज बनेगा। साथ ही, उन्होंने विकासशील देशों का समर्थन करने, संयुक्त राष्ट्र के शांति-रक्षा अभियानों में योगदान देने और बहुपक्षीय संस्थाओं को मजबूत करने की दिशा में भारत के अब तक के कार्यों पर भी प्रकाश डाला।

भारत के 'शांति' फ्रेमवर्क में यूएनएससी अभियान के लिए छह मुख्य प्राथमिकताएं बताई गई हैं। इनमें अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा में 'ग्लोबल साउथ' की आवाज को मजबूत करना, एक ऐसे सुधारे हुए मल्टीलेटरल सिस्टम को आगे बढ़ाना जो लोकतांत्रिक, सभी का प्रतिनिधित्व करने वाला और असरदार हो, आधुनिक टेक्नोलॉजी से लैस भविष्य के लिए तैयार शांति-रक्षा ढांचा बनाना, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए इंसान-केंद्रित नजरिए को बढ़ावा देना, अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार आजाद, खुले और नियमों पर आधारित समुद्री व्यवस्था का समर्थन करना और आतंकवाद व टेरर फाइनेंसिंग से निपटने के लिए वैश्विक प्रयासों को तेज करना शामिल है।

जयशंकर ने कहा कि भारत का नजरिया बातचीत, सहयोग और मतभेदों को दूर करने के प्रयासों पर आधारित होगा, साथ ही वह ऐसे सुधारों की वकालत करेगा जो आज की वैश्विक हकीकत को दर्शाते हों। उन्होंने 'महिला, शांति और सुरक्षा' एजेंडे को आगे बढ़ाने और यह सुनिश्चित करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता भी दोहराई कि शांति-रक्षा मिशन अपने मुख्य उद्देश्यों पर केंद्रित रहें।

भारत अगले साल संयुक्त राष्ट्र जनरल असेंबली में 2028-2029 के कार्यकाल के लिए सिक्योरिटी काउंसिल में एशिया-पैसिफिक क्षेत्र की गैर-स्थायी सीट के लिए चुनाव लड़ेगा। अगर भारत चुना जाता है, तो यह 15 सदस्यों वाली काउंसिल में देश का नौवां कार्यकाल होगा।

नई दिल्ली एक तरफ तो संयुक्त राष्ट्र सिक्योरिटी काउंसिल में सुधार और उसमें स्थायी सीट की अपनी पुरानी मांग पर जोर दे रही है और साथ ही गैर-स्थायी सीट के लिए चुनाव भी लड़ रही है, ताकि ग्लोबल शांति और सुरक्षा पर होने वाली चर्चाओं में उसकी आवाज की अहम भूमिका बनी रहे।

Source: IANS

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