चीन की आर्थिक पकड़ से चिंतित अमेरिकी सांसद और विशेषज्ञ, ट्रंप की टैरिफ नीति पर उठाए सवाल
अमेरिकी सांसदों और विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि महत्वपूर्ण खनिजों, इंफ्रास्ट्रक्चर और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग पर चीन का कब्जा आर्थिक सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा है। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि वाशिंगटन के भारी टैरिफ उन गठबंधनों को कमजोर कर सकते हैं, जिनकी बीजिंग से मुकाबला करने के लिए जरूरत है।

वाशिंगटन, 15 जुलाई । अमेरिकी सांसदों और विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि महत्वपूर्ण खनिजों, इंफ्रास्ट्रक्चर और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग पर चीन का कब्जा आर्थिक सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा है। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि वाशिंगटन के भारी टैरिफ उन गठबंधनों को कमजोर कर सकते हैं, जिनकी बीजिंग से मुकाबला करने के लिए जरूरत है।
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की विदेश मामलों की उपसमिति की आर्थिक सुरक्षा क्षेत्रों और विदेशों में अमेरिकी निवेश पर हुई सुनवाई में 'पैक्स सिलिका' पहल की समीक्षा की गई। इस पहल का मकसद अमेरिकी सहयोगियों और साझेदारों के साथ भरोसेमंद सप्लाई चेन बनाना है।
उपसमिति के अध्यक्ष कोरी मिल्स ने कहा कि जो देश एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, अहम खनिजों, सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर नियंत्रण रखेगा, वही आने वाले दशकों में ग्लोबल वैश्विक अर्थव्यवस्था और शक्ति संतुलन को तय करेगा।
यूएस स्ट्रैटेजिक मेटल्स के मुख्य वाणिज्यिक अधिकारी माइकल होलोमन ने कहा कि वाशिंगटन ने बीजिंग को जरूरी खनिज सप्लाई चेन पर कब्जा करने दिया है। उन्होंने कहा, "मैंने खनिजों की इस 'कोल्ड वॉर' को हमारी भागीदारी के बिना सुलगते हुए देखा है। मैंने देखा है कि चीन ने हमें हर जगह हराया है। ऐसा इसलिए नहीं कि हम कुछ नहीं कर सकते थे, बल्कि इसलिए क्योंकि हमने उस चल रही लड़ाई में हिस्सा ही नहीं लिया।"
होलोमन ने कहा कि अमेरिका चीन से सीधे या परोक्ष रूप से आने वाले मटीरियल के बिना फाइटर जेट, डेटा सेंटर, इलेक्ट्रिक-व्हीकल बैटरी या स्मार्टफोन नहीं बना सकता। उन्होंने कहा, "यह पसंद का मामला नहीं है। यह निर्भरता का मामला है, जो एक ऐसी रणनीतिक कमजोरी बन गई है जो हर साल हमारे कदम न उठाने पर और खराब होती जा रही है।"
होलोमन ने बताया कि दुनिया का लगभग 75 प्रतिशत कोबाल्ट कांगो में निकाला जाता है, लेकिन इसका एक बड़ा हिस्सा चीन में प्रोसेस किया जाता है। अमेरिका 13 अहम खनिजों के लिए पूरी तरह से और अन्य 20 खनिजों के लिए 50 प्रतिशत से अधिक आयात पर निर्भर है।
कैटो इंस्टीट्यूट के शोधकर्ता क्लार्क पैकार्ड ने कहा कि चीन का दबदबा एक वास्तविक कमजोरी है। उन्होंने टंगस्टन का उदाहरण दिया, जिसका इस्तेमाल मिसाइलों, सेमीकंडक्टर, एयरोस्पेस कंपोनेंट्स और आर्मर-पियर्सिंग गोला-बारूद में किया जाता है। उन्होंने कहा, "चीन ग्लोबल सप्लाई चेन के लगभग 80 प्रतिशत हिस्से को नियंत्रित करता है।"
पैकर्ड ने कहा कि 2025 में बीजिंग की ओर से सात रेयर-अर्थ एलिमेंट्स और मैग्नेट के निर्यात पर लगभग पूरी तरह से रोक लगाने से अमेरिकी सेमीकंडक्टर और डिफेंस सप्लाई चेन बाधित हो गई थी। उन्होंने बताया कि शिकागो में फोर्ड का एक असेंबली प्लांट रेयर-अर्थ मैग्नेट की कमी के कारण एक सप्ताह के लिए बंद हो गया था।
पैकार्ड ने चेतावनी दी कि अमेरिका के व्यापक टैरिफ से बीजिंग के खिलाफ गठबंधन बनाने की कोशिशों को नुकसान पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि टैरिफ की वजह से भरोसेमंद सहयोगियों के साथ रिश्ते तनावपूर्ण हो गए और अमेरिकी मैन्युफैक्चरर्स के लिए लागत बढ़ गई।
उन्होंने कहा, "यह बीजिंग के लिए एक तोहफा है, जो खुद को अधिक भरोसेमंद आर्थिक व्यापारिक साझेदार के तौर पर पेश करके खुश है। हमें दोस्तों और सहयोगियों के लिए दरवाजे खोलने चाहिए, न कि टैरिफ की दीवारों के पीछे छिपना चाहिए।"
एक्रो ब्रिज में अंतरराष्ट्रीय कारोबार के अध्यक्ष पॉल सुलिवन ने कहा कि चीनी कंपनियां अक्सर सब्सिडी वाले फाइनेंस, बंडल प्रोजेक्ट्स और कूटनीतिक समर्थन के साथ विदेशी बाजारों में उतरती हैं, जिनका मुकाबला निजी अमेरिकी कंपनियां नहीं कर सकतीं।
चीन ने डिफेंस सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरी और क्लीन-एनर्जी टेक्नोलॉजी के लिए जरूरी खनिजों की माइनिंग और प्रोसेसिंग में मजबूत स्थिति बना ली है। पश्चिमी सरकारें लगातार मित्र देशों में वैकल्पिक सप्लायर और प्रोसेसिंग सुविधाएं तलाश रही हैं।
Source: IANS

