बोस्टन में भारतीय नौसेना के जवानों का मार्च पास्ट, शान से लहराया तिरंगा

नई दिल्ली, 15 जुलाई । अमेरिका के ऐतिहासिक शहर बोस्टन की मुख्य सड़कों पर भारतीय नौसेना के जवानों ने कदमताल किया है। दरअसल, अमेरिकी शहर में आयोजित हुई यह परेड नौकायन पोत आईएनएस सुदर्शिनी के माध्यम से भारत की समृद्ध समुद्री विरासत और सांस्कृतिक परंपराओं का एक भव्य प्रदर्शन था।

बोस्टन पहुंचे इस पोत ने वैश्विक स्तर पर 20 से अधिक देशों के 60 से भी ज्यादा विशाल नौकायन जहाजों के साथ प्रतिष्ठित ‘सेल बोस्टन 2026’ कार्यक्रम में हिस्सा लिया। बोस्टन की ऐतिहासिक सड़कों पर आयोजित ‘क्रू एवं कैडेट सिटी परेड’ के दौरान आईएनएस सुदर्शिनी के चालक दल और प्रशिक्षुओं ने पूरे उत्साह के साथ मार्च किया। भारतीय दल की इस अनुशासित और आकर्षक प्रस्तुति ने स्थानीय निवासियों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों का भी ध्यान अपनी ओर खींचा। इस परेड के माध्यम से भारत के नौवहन इतिहास, समुद्री परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान की शानदार झलक देखने को मिली।

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस सहभागिता ने भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चले आ रहे समुद्री सहयोग को और मजबूत करने का संदेश दिया। साथ ही यह भी दर्शाया कि समुद्र केवल व्यापार और सुरक्षा का माध्यम नहीं, बल्कि देशों और समाजों को जोड़ने वाला एक सशक्त सेतु भी है। इससे पहले आईएनएस सुदर्शिनी ने न्यूयॉर्क में आयोजित भव्य ‘सेल फोर्थ 250’ समारोह में हिस्सा लेकर हजारों दर्शकों के बीच भारतीय तिरंगे की शान बढ़ाई थी। न्यूयॉर्क में अपनी सफल उपस्थिति दर्ज कराने के बाद यह पोत बोस्टन पहुंचा। यहां दुनिया के विभिन्न देशों के पारंपरिक नौकायन पोत एक साथ समुद्री विरासत का उत्सव मना रहे हैं।

‘लोकायन 2026’ अभियान के तहत आईएनएस सुदर्शिनी अमेरिका के विभिन्न बंदरगाहों की यात्रा कर रहा है। इस अभियान का उद्देश्य भारत की समुद्री विरासत, नौवहन परंपराओं और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के संदेश को दुनिया तक पहुंचाना है। नॉरफॉक से बोस्टन तक की यात्रा के दौरान पोत ने भारतीय संस्कृति, मित्रता और सद्भावना का संदेश भी प्रसारित किया। भारतीय नौसेना का यह ऐतिहासिक नौकायन पोत जहां भी पहुंच रहा है, वहां भारत की समुद्री शक्ति, सांस्कृतिक समृद्धि और वैश्विक साझेदारी की नई कहानी लिख रहा है।

बोस्टन में उसकी मौजूदगी ने एक बार फिर साबित किया कि भारत की समुद्री विरासत केवल इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि आज भी दुनिया को जोड़ने वाली एक जीवंत शक्ति है। गौरतलब है कि आईएनएस सुदर्शिनी भारतीय नौसेना का पाल वाला पोत है। प्राचीन जहाज निर्माण पद्धति पर आधारित इस पोत का उपयोग प्रशिक्षण, समुद्री जागरूकता और अंतरराष्ट्रीय सद्भावना यात्राओं के लिए किया जा रहा है। वर्तमान में यह पोत लोकायन 2026 वैश्विक समुद्री अभियान पर है। इसके तहत विभिन्न यह अलग-अलग देशों के बंदरगाहों का दौरा कर भारत की समुद्री विरासत, संस्कृति और नौसैनिक परंपराओं का प्रचार-प्रसार कर रहा है।

Source: IANS

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