भारत-स्वीडन साझेदारी पर पीयूष गोयल का बयान: सहयोग से ही संभव है टिकाऊ

नई दिल्ली, 19 मई । केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को कहा कि भारत-स्वीडन साझेदारी इस साझा विश्वास को दर्शाती है कि सरकारों, उद्योगों, इनोवेटर्स और वित्तीय संस्थानों के सहयोग से औद्योगिक परिवर्तन को आगे बढ़ाया जा सकता है।

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट शेयर करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन ने एक प्रभावशाली लेख लिखा है, जिसमें टिकाऊ विकास, स्वच्छ ऊर्जा और नवाचार आधारित प्रगति को लेकर दोनों देशों की साझा सोच को सामने रखा गया है।

'भारत और स्वीडन: विकास, लचीलापन और स्थिरता एक साथ हासिल करना…' शीर्षक वाले इस लेख में कहा गया है कि मौजूदा समय में दुनिया भू-राजनीतिक अनिश्चितता, ऊर्जा असुरक्षा और आर्थिक विभाजन जैसी बड़ी चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे दौर में देशों के सामने दो विकल्प हैं—या तो वे केवल अपने सीमित राष्ट्रीय हितों तक सिमट जाएं या फिर ऐसे वैश्विक सहयोग को मजबूत करें जो विकास, स्थिरता और टिकाऊ भविष्य सुनिश्चित कर सके।

लेख में यह भी कहा गया कि संयुक्त राष्ट्र की 80वीं वर्षगांठ के मौके पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग और बहुपक्षवाद की अहमियत पहले से ज्यादा स्पष्ट हो गई है। साथ ही, वैश्विक संस्थाओं में सुधार की जरूरत भी महसूस की जा रही है ताकि वे वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप काम कर सकें।

लेख में आगे कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन आज दुनिया की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है, जिसका असर भारत, स्वीडन समेत सभी देशों की अर्थव्यवस्थाओं और समाज पर पड़ रहा है। हालांकि, जलवायु कार्रवाई को विकास की जरूरतों से अलग नहीं किया जा सकता।

इसमें कहा गया कि दुनिया भर में अरबों लोग बेहतर जीवन स्तर, रोजगार, आधुनिक बुनियादी ढांचे और ऊर्जा तक पहुंच की उम्मीद रखते हैं। ऐसे में विकास और पर्यावरण संरक्षण को साथ लेकर चलना ही आज की सबसे बड़ी आर्थिक और राजनीतिक आवश्यकता बन गया है।

इससे पहले केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने एक अन्य पोस्ट में बताया कि उन्होंने दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू से मुलाकात की और दिल्ली के विकास से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा की।

उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और नागरिकों के जीवन को आसान बनाना दिल्ली के निरंतर विकास के लिए सरकार की प्राथमिकता है।

Source: IANS

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