इंडिया-नॉर्डिक समिट 2026 से वैश्विक टेक्नोलॉजी गवर्नेंस के नियमों को नए तरीके से परिभाषित करने में मिलेगी मदद

नई दिल्ली, 21 मई । ओस्लो में आयोजित तीसरे इंडिया-नॉर्डिक समिट 2026 ने वैश्विक टेक्नोलॉजी गवर्नेंस को नए तरीके से परिभाषित करने की दिशा में बड़ा संकेत दिया है। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत अब केवल नियमों को मानने वाला देश नहीं, बल्कि डिजिटल और एआई नियमों का सह-निर्माता बनकर उभरा है।

इंडिया नैरेटिव की रिपोर्ट के अनुसार, नॉर्डिक देशों के नेताओं ने इस रिश्ते को ग्रीन टेक्नोलॉजी और इनोवेशन-आधारित रणनीतिक साझेदारी के रूप में पेश किया। उनका मानना है कि भारत में सप्लाई चेन, रिसर्च सहयोग और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने से व्यावसायिक लाभ के साथ भू-राजनीतिक मजबूती भी मिलेगी।

दोनों पक्ष एक-दूसरे को रणनीतिक साझेदार के रूप में देख रहे हैं। भारत को समावेशी डिजिटल इनोवेशन के बड़े प्रयोगशाला मॉडल के तौर पर देखा जा रहा है, जबकि नॉर्वे को हाई-टेक, ग्रीन-टेक और बेहतर गवर्नेंस विशेषज्ञता वाला मजबूत देश माना जा रहा है।

रिपोर्ट में कहा गया कि नई दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट ने यह साबित कर दिया है कि भारत अब सिर्फ दूसरे देशों के बनाए नियम लागू नहीं कर रहा, बल्कि अपनी खुद की एआई गवर्नेंस व्यवस्था तैयार कर रहा है और ग्लोबल नॉर्थ व ग्लोबल साउथ दोनों को इसमें शामिल होने का न्योता दे रहा है।

ओस्लो बैठक का मुख्य एजेंडा समावेशी और मानव-केंद्रित एआई सहयोग था, जो नॉर्डिक देशों के सामाजिक-लोकतांत्रिक टेक मूल्यों और भारत के नेतृत्व वाले एआई इम्पैक्ट डिक्लेरेशन के बीच बढ़ती समानता को दिखाता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस घोषणा में मानव संसाधन, समावेशन, भरोसेमंद एआई और एआई संसाधनों के लोकतांत्रिक उपयोग पर जोर दिया गया है। यह सोच वॉशिंगटन और ब्रसेल्स में होने वाली सुरक्षा-केंद्रित बहसों से काफी अलग है।

रिपोर्ट में कहा गया, "पिछले एक दशक में भारत ने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का मजबूत ढांचा तैयार किया है। इसमें पहचान के लिए आधार, त्वरित भुगतान के लिए यूपीआई और ओपन एपीआई शामिल हैं, जिनकी मदद से निजी कंपनियां सरकारी प्लेटफॉर्म पर सेवाएं तैयार कर सकती हैं।"

ये सिस्टम अब एक अरब से अधिक लोगों के लिए कल्याणकारी योजनाओं, वित्तीय समावेशन और रोजमर्रा के लेनदेन की आधारशिला बन चुके हैं। साथ ही, इन्हें एशिया और अफ्रीका के कई देशों में भी अपनाया जा रहा है, जिनमें ओपन-सोर्स पहचान प्लेटफॉर्म एमओएसआईपी और वैक्सीन सर्टिफिकेशन सिस्टम शामिल हैं।

रिपोर्ट में कहा गया कि नॉर्वे में डेटा सुरक्षा और नागरिक स्वतंत्रता की मजबूत परंपरा है। ऐसे में वह भारत को अपने डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन कानून और एआई प्रयोगों में और मजबूत सुरक्षा उपाय अपनाने के लिए प्रेरित कर सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, नॉर्डिक कंपनियां बढ़ती लागत और सप्लाई चेन की स्थिरता को लेकर राजनीतिक दबाव का सामना कर रही हैं। ऐसे में भारत में उत्पादन और रिसर्च एंड डेवलपमेंट गतिविधियों को बढ़ाना चीन पर निर्भरता कम करने में मदद करेगा।

इसके अलावा, इससे नॉर्वे को भारत की बड़ी एसटीईएम प्रतिभा और तेजी से विकसित हो रहे डेटा तथा एआई नियामकीय ढांचे का लाभ भी मिलेगा।

Source: IANS

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