विदेश मंत्री जयशंकर ने कैरेबियाई देशों के विदेश मंत्रियों से की

न्यूयॉर्क, 24 सितंबर । विदेश मंत्री (ईएएम) एस. जयशंकर ने कैरिबियन क्षेत्र के 15 देशों वाले कैरिकॉम (सीएआरआईसीओएम) समूह के विदेश मंत्रियों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बुधवार (स्थानीय समय) को हुई बैठक के बाद 'एक्स' पोस्ट में कहा, "आज न्यूयॉर्क में भारत-कैरिकॉम विदेश मंत्रियों की बैठक के लिए कैरिबियन के सहयोगियों के साथ शामिल होकर खुशी हुई। बैठक का संचालन करने के लिए कैरिकॉम की महासचिव डॉ. कार्ला बार्नेट और सूरीनाम के विदेश मंत्री मेल्विन बौवा का विशेष आभार।"

उन्होंने बताया कि बैठक के दौरान हमारे साझा इतिहास और विकास की चुनौतियों से मिली हमारी एकजुटता पर जोर दिया गया। यह बताया गया कि कई कैरिबियाई देशों में छोटे और मध्यम उद्यमों (एसएमई) और त्वरित प्रभाव परियोजनाएं (क्यूआईपी) पूरे हो चुके हैं, और कुछ में जारी हैं।

क्यूआईपी, उन प्रोजेक्ट्स के लिए फंड और अन्य संसाधन उपलब्ध कराता है, जिन्हें जल्दी पूरा किया जा सकता है और जिनका समुदाय पर प्रभाव पड़ता है।

मेडिकल क्षेत्र में, उन्होंने बताया कि भारत ने कृत्रिम अंग लगाने के कैंप आयोजित किए, हीमोडायलिसिस यूनिट्स उपहार में दीं और कुछ कैरीकॉम साझेदारों को कॉम्पैक्ट मेडिकल 'भीष्म क्यूब' यूनिट्स उपलब्ध कराईं। भारत की ओर विकसित 'भीष्म क्यूब' आपदा प्रभावित क्षेत्रों में तैनात करने के लिए एक पोर्टेबल हॉस्पिटल सिस्टम है।

कैरिबियन समुदाय संगठन, जिसे आमतौर पर कैरिकॉम कहा जाता है, के तीन देशों (सूरीनाम, त्रिनिदाद और गुयाना) में भारतीय मूल के लोगों की काफी आबादी है। बाकी देशों के साथ भारत का औपनिवेशिक शासन का साझा इतिहास रहा है।

विदेश मंत्री जयशंकर ने लिखा, "उन्होंने कैरीकॉम देशों से भारत की ओर से उपलब्ध कराए गए ट्रेनिंग स्लॉट का उपयोग करने का आग्रह किया। उनकी रुचि के क्षेत्रों में अनुकूलित प्रशिक्षण कार्यक्रम की पेशकश भी की।"

भारत वैश्विक दक्षिण के देशों के लिए कई क्षेत्रों में, विशेष रूप से डिजिटल प्रौद्योगिकियों में, प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रदान करता है।

कैरीकॉम देशों को भारत की सहायता का जायजा लेते हुए विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि इससे क्षेत्र में सौर ऊर्जा की स्थापना को बढ़ावा मिला है और उनसे ' अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन' और ' वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन' में शामिल होने पर विचार करने का अनुरोध किया।

दोनों संगठनों का मुख्यालय भारत में है। ये टिकाऊ विकास के लिए ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों और जलवायु परिवर्तन से निपटने के तरीकों को बढ़ावा देते हैं।

Source: IANS

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