खाड़ी से निकलने का इंतजार कर रहे करीब दो हजार जहाज: स्कॉट बेसेंट

वाशिंगटन, 29 मई । अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने बताया क‍ि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास तनाव की वजह से लगभग 2,000 जहाज इस समय खाड़ी से बाहर निकलने का इंतजार कर रहे हैं।

ट्रंप के एक टॉप कैबिनेट मेंबर के इस खुलासे से पहली बार अंदाजा लगा है कि इस अहम समुद्री रास्ते पर कितना बड़ा जाम लग चुका है। दुनिया के तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) का बड़ा हिस्सा आम तौर पर इसी रास्ते से गुजरता है।

व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए बेसेंट ने कहा क‍ि करीब 2,000 जहाज खाड़ी से बाहर आने का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने भरोसा जताया कि जैसे ही शिपिंग दोबारा सामान्य होगी, दुनिया के बाजार इस स्थिति को संभाल लेंगे।

उन्होंने कहा क‍ि मुझे लगता है कि इसके बाद तेल की सप्लाई काफी अच्छी रहेगी और कीमतें बहुत जल्दी नीचे आ सकती हैं।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अब ट्रंप प्रशासन और ईरान के बीच चल रही बातचीत का बड़ा मुद्दा बन गया है। बेसेंट ने बार-बार कहा कि समुद्री रास्तों पर फिर से बिना रुकावट आवाजाही शुरू कराना अमेरिका की बड़ी प्राथमिकताओं में से एक है।

उन्होंने कहा क‍ि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही पूरी तरह खुली होनी चाहिए। समुद्र में पहले की तरह खुला और सुरक्षित आवागमन जरूरी है।

यह जहाजों की भीड़ ऐसे समय में बढ़ी है जब दुनिया भर की सरकारें और कंपनियां इस बात पर नजर रखे हुए हैं कि कहीं ऊर्जा सप्लाई और व्यापार पर लंबे समय तक असर न पड़े।

बेसेंट का कहना है कि बाजार अभी भी मजबूत स्थिति में है और जैसे ही हालात सुधरेंगे, बड़ी संख्या में जहाज एक साथ रवाना हो सकते हैं। उन्होंने कहा क‍ि जैसे ही यह रास्ता खुलेगा, हम जहाजों की एक बड़ी लहर बाहर निकलते देखेंगे।

ट्रेजरी सेक्रेटरी ने कहा कि अमेरिकी सरकार का मानना है कि देरी के बावजूद ऊर्जा बाजार में सप्लाई फिलहाल पर्याप्त है। उन्होंने बताया कि मई महीने में तेल की कीमतों में गिरावट आई है। हमने देखा है कि मई में तेल की कीमतें करीब दस प्रतिशत नीचे आई हैं।

बेसेंट की इन बातों का मकसद उन मार्केट प्लेयर्स को भरोसा दिलाना था जो इस बात से चिंतित हैं कि अगर खाड़ी क्षेत्र में शिपिंग लंबे समय तक प्रभावित रही, तो तेल की कीमतें और महंगाई फिर बढ़ सकती है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। इसे दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में गिना जाता है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और दूसरे खाड़ी देशों का बड़ा ऊर्जा निर्यात इसी रास्ते पर निर्भर करता है।

Source: IANS

अन्य समाचार

Advertisement

Advertisement

Advertisement

Get Newsletter

Advertisement