भारत और ऑस्ट्रेलिया ने कृषि कारोबार में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए 'एग्रीमैत्री' पहल की शुरुआत की: रिपोर्ट

नई दिल्ली, 3 अप्रैल। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच कृषि व्यवसाय (एग्रीबिजनेस) सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से 'एग्रीमैत्री' पहल की शुरुआत की गई है। इस दिशा में वेस्टर्न सिडनी विश्वविद्यालय ने हाल ही में एक विशेष राउंडटेबल बैठक का आयोजन किया, जिसका पहला सत्र राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित हुआ। 

द ऑस्ट्रेलिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, 'एग्रीमैत्री इंडिया राउंडटेबल' का पहला आयोजन ऑस्ट्रेलियाई उच्चायोग (ऑस्ट्रेलियन हाई कमीशन) में किया गया, जो दोनों देशों के बीच कृषि क्षेत्र में सहयोग को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य भारत और ऑस्ट्रेलिया के विभिन्न हितधारकों को एक मंच पर लाकर व्यावहारिक और बड़े स्तर पर लागू किए जा सकने वाले समाधान तैयार करना है।

इस परियोजना का नेतृत्व कर रहीं डॉ. वनिता यादव ने कहा कि यह राउंडटेबल विभिन्न क्षेत्रों के लोगों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने और कृषि क्षेत्र की चुनौतियों का समाधान खोजने की दिशा में एक अहम शुरुआत है।

इस कार्यक्रम में सरकार, उद्योग, एग्रीटेक कंपनियों, शोध संस्थानों, शिक्षा जगत और व्यापार संगठनों से जुड़े कुल 58 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसने भारत और ऑस्ट्रेलिया के हितधारकों के बीच विचारों के आदान-प्रदान का एक मजबूत मंच प्रदान किया।

'एग्रीमैत्री' पहल को दोनों देशों के विशेषज्ञों की एक बहु-विषयक टीम आगे बढ़ा रही है, जिसे विभिन्न साझेदार संस्थानों का सहयोग प्राप्त है। यह पहल ऑस्ट्रेलिया-भारत संबंध केंद्र के तहत मिलने वाले 'मैत्री रिसर्च ग्रांट' से समर्थित है, जो ऑस्ट्रेलिया के विदेश मामलों और व्यापार विभाग के अंतर्गत कार्य करता है।

डॉ. यादव ने बताया कि 'मैत्री' शब्द, जिसका संस्कृत में अर्थ 'मित्रता' होता है, इस पहल की मूल भावना को दर्शाता है। इसका उद्देश्य दोनों देशों की पूरक ताकतों को जोड़ते हुए कृषि क्षेत्र में नई संभावनाएं तलाशना और चुनौतियों का समाधान करना है।

वहीं, प्रोफेसर बसंत माहेश्वरी ने कहा कि यह पहल सिर्फ विचार-विमर्श तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका लक्ष्य इन विचारों को ठोस परियोजनाओं में बदलना है, जिससे दोनों देशों को आर्थिक और सामाजिक लाभ मिल सके।

इस 'एग्रीमैत्री' राउंडटेबल को भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच कृषि क्षेत्र में सहयोग को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक रणनीतिक पहल माना जा रहा है, जो नवाचार, स्थिरता और आपसी विकास को बढ़ावा देगी।

Source: IANS

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