वैश्विक ऊर्जा और वस्तुओं की बढ़ती कीमतों से बढ़ी थोक महंगाई: सरकार

नई दिल्ली, 3 अगस्त । सरकार ने सोमवार को संसद में बताया कि जून में थोक महंगाई (डब्ल्यूपीआई इन्फ्लेशन) में बढ़ोतरी का मुख्य कारण वैश्विक बाजार में ऊर्जा और अन्य वस्तुओं की बढ़ती कीमतें रहीं। खनिज तेल, खाद्य पदार्थ, धातु, रसायन और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी का असर थोक महंगाई पर पड़ा है।

लोकसभा में एक लिखित जवाब में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि सरकार महंगाई को नियंत्रित करने और आम लोगों पर इसके प्रभाव को कम करने के लिए लगातार कई कदम उठा रही है। इन उपायों के कारण खुदरा महंगाई (सीपीआई) को काफी हद तक नियंत्रण में रखने में सफलता मिली है।

मंत्री ने बताया कि सरकार ने आवश्यक खाद्य वस्तुओं का बफर स्टॉक बढ़ाया है, खुले बाजार में अनाज की बिक्री की है और जरूरत के अनुसार व्यापार नीतियों में बदलाव किए हैं। इन कदमों का उद्देश्य खाद्य वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित रखना और उपभोक्ताओं को राहत देना है।

आंकड़ों के अनुसार, मई में थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित महंगाई दर 9.68 प्रतिशत थी, जो जून में बढ़कर 9.87 प्रतिशत हो गई। हालांकि सरकार का कहना है कि यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से उन वस्तुओं में आई कीमतों की वजह से हुई है, जो वैश्विक बाजार के उतार-चढ़ाव से अधिक प्रभावित होती हैं।

पंकज चौधरी ने कहा कि पेट्रोलियम उत्पाद, खनिज तेल, खाद्य सामग्री, बेसिक मेटल, रसायन और रासायनिक उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी ने थोक महंगाई को ऊपर धकेला है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा और कमोडिटी की कीमतों में आई तेजी का सीधा असर इन क्षेत्रों पर दिखाई दिया।

दूसरी ओर, खुदरा महंगाई दर सरकार द्वारा तय लक्ष्य के दायरे में बनी हुई है। वित्त वर्ष 2026-27 की जनवरी से मार्च तिमाही में खुदरा महंगाई 3.1 प्रतिशत रही, जबकि अप्रैल से जून तिमाही में यह 3.9 प्रतिशत दर्ज की गई।

सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के साथ मिलकर मार्च 2026 में अगले पांच वर्षों के लिए खुदरा महंगाई का लक्ष्य तय किया था। इसके तहत 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक महंगाई का लक्ष्य 4 प्रतिशत रखा गया है। साथ ही इसमें 2 प्रतिशत की निचली और 6 प्रतिशत की ऊपरी सीमा तय की गई है।

इस बीच, जून 2026 में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.38 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो मई में 3.93 प्रतिशत थी। खाद्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि और ईंधन महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ने को इसका प्रमुख कारण माना जा रहा है।

Source: IANS

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