कमजोर वैश्विक संकेतों के चलते लाल निशान में खुला बाजार, सेंसेक्स 227 अंक गिरा, आईटी और रियल्टी शेयरों पर दबाव
अमेरिका और ईरान के बीच नए सिरे से तनाव बढ़ने के बीच कमजोर वैश्विक संकेतों के चलते भारतीय शेयर बाजार गुरुवार के सत्र में गिरावट के साथ लाल निशान में खुला।

मुंबई, 4 जून । अमेरिका और ईरान के बीच नए सिरे से तनाव बढ़ने के बीच कमजोर वैश्विक संकेतों के चलते भारतीय शेयर बाजार गुरुवार के सत्र में गिरावट के साथ लाल निशान में खुला।
इस दौरान, 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद 74,346.17 से 410.34 अंक गिरकर 73,935.83 पर खुला तो वहीं एनएसई निफ्टी 50 अपने पिछले बंद 23,405.60 से 123.15 अंक गिरकर 23,282.45 पर खुला।
खबर लिखे जाने तक (सुबह करीब 9.30 बजे) सेंसेक्स 227.52 अंकों यानी 0.31 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74,118.65 पर था, जबकि निफ्टी50 80.05 अंक यानी 0.34 प्रतिशत गिरकर 23,325.55 पर ट्रेड कर रहा था।
निफ्टी 50 पैक में ट्रेंट, टीएमपीवी, इंफोसिस, आयशर मोटर और एचडीएफसी बैंक के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई, जबकि इसके विपरीत इटरनल, टाइटन, एशियन पेंट्स और अदाणी इंटरप्राइजेज के शेयरों में सबसे ज्यादा बढ़त दर्ज की गई।
व्यापक बाजारों में, निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.17 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.09 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई।
सेक्टरवार देखें तो निफ्टी रियल्टी, निफ्टी आईटी, निफ्टी मेटल और निफ्टी प्राइवेट बैंक में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, निफ्टी ऑयल एंड गैस और निफ्टी केमिकल और निफ्टी एफएमसीजी बेहतर प्रदर्शन करते नजर आए।
घरेलू मोर्चे पर, निवेशक शुक्रवार को जारी होने वाले भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक के परिणाम की प्रतीक्षा करते हुए सतर्कता बरत सकते हैं।
ईरान ने बुधवार तड़के कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हमला किया। इससे एक दिन पहले अमेरिकी केंद्रीय कमान ने कहा था कि उन्होंने ईरान से दागी गई कई बैलिस्टिक मिसाइलों को रोका है और फारस की खाड़ी में स्थित क़ेशम द्वीप पर रक्षात्मक हमले भी किए हैं।
इसी बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मीडिया से बातचीत में कहा कि ईरान परमाणु हथियार न रखने पर सहमत हो गया है। अमेरिका ने यह भी कहा कि अगर हिज्बुल्लाह अपना विरोध बंद कर दे तो इजरायल लेबनान के साथ युद्धविराम के लिए सहमत है।
एक मार्केट एक्सपर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी तनाव और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की लगातार और बड़े पैमाने पर बिकवाली बाजार पर दबाव बना रही है। जब तक पश्चिम एशिया संकट का कोई ठोस समाधान नहीं निकलता, तब तक बाजार में मजबूत और टिकाऊ तेजी की संभावना कम दिखाई देती है। वहीं अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे देशों के शेयर बाजारों में जारी तेजी यह संकेत देती है कि विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से और अधिक पैसा निकाल सकते हैं।
एक्सपर्ट ने आगे कहा कि विदेशी निवेशकों द्वारा डेरिवेटिव बाजार में बड़ी मात्रा में शॉर्ट पोजिशन बनाना भी बाजार में आगे और कमजोरी आने की आशंका को बढ़ाता है। हालांकि यदि पश्चिम एशिया संकट का कोई अप्रत्याशित समाधान निकलता है और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आती है, तो स्थिति बदल सकती है। लेकिन लेबनान में फिर से बढ़े संघर्ष और अमेरिका तथा ईरान के बीच समय-समय पर हो रही सैन्य झड़पें इस बात का संकेत देती हैं कि फिलहाल संकट का कोई त्वरित समाधान नजर नहीं आ रहा है।
एक्सपर्ट के अनुसार, ऐसे अत्यधिक उतार-चढ़ाव और अनिश्चितता वाले माहौल में ट्रेडिंग करना काफी जोखिम भरा हो सकता है। इस समय सबसे बेहतर रणनीति "इंतजार करो और देखो (वेट एंड वाच)" की हो सकती है। हालांकि बाजार में आने वाली कमजोरी लंबे समय के निवेशकों के लिए अच्छे अवसर भी पैदा कर सकती है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली के कारण दबाव में आए मजबूत और गुणवत्तापूर्ण शेयर आकर्षक मूल्यांकन पर मिल सकते हैं।
एक्सपर्ट ने आगे कहा कि लंबी अवधि के निवेशक ऐसे शेयरों में निवेश पर विचार कर सकते हैं जिनका जोखिम-रिटर्न अनुपात फिलहाल बेहतर नजर आता हो। उदाहरण के लिए, हाल के दिनों में दबाव में रहे प्रमुख बैंकिंग शेयरों में रिकवरी देखने को मिली है। इसी तरह फार्मा सेक्टर फिलहाल कमजोर दिख रहा है, लेकिन इसमें वापसी की अच्छी संभावना है। ऑटो और ऑटो एंसिलरी (वाहन पुर्जे बनाने वाली कंपनियां) सेक्टर भी लंबी अवधि के नजरिए से मजबूत और आकर्षक दिखाई दे रहे हैं।
Source: IANS
