एआई अगले 10 वर्षों में भारत की अर्थव्यवस्था में जोड़ सकता है 79 अरब डॉलर: रिपोर्ट
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) अगले एक दशक में भारत की अर्थव्यवस्था में 79 अरब डॉलर तक का योगदान दे सकती है।
नई दिल्ली, 5 नवंबर । आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) अगले एक दशक में भारत की अर्थव्यवस्था में 79 अरब डॉलर तक का योगदान दे सकती है। गुरुवार को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, एआई क्षमता के मामले में भारत 56 कॉमनवेल्थ देशों में 11वें स्थान पर है और युवाओं की बड़ी आबादी के कारण वैश्विक एआई परिदृश्य में उसकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
आयर थिंक टैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 38.2 करोड़ युवा हैं, जो कॉमनवेल्थ देशों की कुल 73.2 करोड़ युवा आबादी के आधे से अधिक हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं। यह जनसांख्यिकीय ताकत भारत को एआई आधारित अर्थव्यवस्था के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करती है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय युवाओं में एआई को लेकर उत्साह काफी अधिक है। लगभग 89 प्रतिशत युवा अगले एक वर्ष के भीतर शिक्षा या रोजगार से जुड़े कार्यों में एआई का उपयोग करना चाहते हैं। वहीं 60 प्रतिशत से अधिक युवाओं ने कहा कि उन्हें एआई-आधारित उपकरणों के साथ काम करने और उनका उपयोग करने का आत्मविश्वास है।
भारत के व्यापक डिजिटल बुनियादी ढांचे, मजबूत 4जी कनेक्टिविटी और दुनिया के सबसे सस्ते मोबाइल डेटा में से एक होने के कारण एआई अपनाने की क्षमता को भी बड़ा समर्थन मिला है। हालांकि रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि अभी केवल लगभग दो-तिहाई युवाओं के पास ही व्यक्तिगत मोबाइल फोन हैं, जो डिजिटल पहुंच के क्षेत्र में मौजूद चुनौतियों को दर्शाता है।
रिपोर्ट ने श्रम बाजार से जुड़े कुछ मुद्दों की ओर भी ध्यान आकर्षित किया है। इसके अनुसार करीब 30 प्रतिशत युवा रोजगार, शिक्षा या प्रशिक्षण से बाहर हैं, जबकि लगभग 86 प्रतिशत युवा कार्यबल असंगठित क्षेत्र में कार्यरत है। ऐसे में एआई आधारित कौशल विकास कार्यक्रम रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
आयर थिंक टैंक के विश्लेषण के अनुसार, मध्यम परिदृश्य में एआई भारत की जीडीपी में अगले 10 वर्षों में 79.1 अरब डॉलर का अतिरिक्त योगदान दे सकता है। यह योगदान सतर्क अनुमान के अनुसार 39.6 अरब डॉलर और आशावादी स्थिति में 118.7 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। इस आधार पर भारत कॉमनवेल्थ देशों में एआई से मिलने वाले आर्थिक लाभ के मामले में दूसरा सबसे बड़ा अवसर बनकर उभरता है।
आयर थिंक टैंक के संस्थापक कैल्विन आयर ने कहा कि भारत पहले ही अपनी तकनीकी क्षमताओं को रोजगार सृजन में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है। उन्होंने उल्लेख किया कि अगस्त 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक वर्ष के भीतर एक करोड़ युवाओं को एआई कौशल प्रदान करने की योजना की घोषणा की थी।
उन्होंने कहा कि इसके बाद सरकार ने इंटेल इंडिया के सहयोग से नए एआई प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए, जिनका उद्देश्य युवाओं को उभरते प्रौद्योगिकी आधारित रोजगार बाजार के लिए व्यावहारिक कौशल उपलब्ध कराना है। उन्होंने बताया कि ये पहल भारत में एआई के प्रति मौजूद उत्साह को रोजगार, उद्यमिता और आर्थिक विकास में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत एआई के लिए तैयार कार्यबल विकसित करने हेतु बड़े पैमाने पर प्रशिक्षण कार्यक्रमों और उद्योग साझेदारियों को बढ़ावा दे रहा है। इससे युवाओं को भविष्य की तकनीक आधारित नौकरियों के लिए तैयार किया जा सकेगा।
रिपोर्ट ने सरकारों के लिए एआई से अधिकतम लाभ प्राप्त करने के पांच प्रमुख क्षेत्रों की पहचान की है, जिनमें तकनीक तक सस्ती पहुंच बढ़ाना, कौशल-आधारित शिक्षा को प्रोत्साहित करना, प्रशिक्षण और रोजगार के बीच बेहतर संपर्क स्थापित करना, स्थानीय भाषाओं और जरूरतों के अनुरूप एआई समाधान विकसित करना तथा ऐसे सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करना शामिल है, जिनसे लोग स्वचालित निर्णयों को चुनौती दे सकें।
Source: IANS