सीएएस सिस्टम लागू होने के बाद सेंसेक्स की पहली एक्सपायरी, देखने को

मुंबई, 6 अगस्त । बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) के मुख्य सूचकांक सेंसेक्स के डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स की गुरुवार को वीकली एक्सपायरी है और बीएसई कैश मार्केट में कम तरलता के बीच हाल ही में लागू हुए नए क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम (सीएएस) के कारण बाजार में अधिक उतार-चढ़ाव देखने मिल सकता है।

मंगलवार को निफ्टी की एक्सपायरी के बाद बाजार भागीदार ट्रेडिंग में सावधानी बरत रहे हैं। उस दिन क्लोजिंग ऑक्शन के दौरान बेंचमार्क इंडेक्स में 150 अंक से अधिक की तेजी आई थी, जिससे डेरिवेटिव्स में जबरदस्त हलचल हुई और कई ट्रेडर्स हैरान रह गए थे।

कई विश्लेषकों का मानना ​​है कि सेंसेक्स को लेकर चिंताएं अधिक हैं, क्योंकि इंडेक्स से जुड़े कैश मार्केट में एनएसई के मुकाबले ऑक्शन विंडो के दौरान काफी कम भागीदारी होती है। इससे इस बात की संभावना बढ़ जाती है कि फाइनल सेटलमेंट प्राइस पर बड़े ट्रेड का असर अधिक पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि इस सिस्टम की कामयाबी बाजार में व्यापक भागीदारी पर निर्भर करती है।

मार्केट एक्सपर्ट्स ने यह भी बताया कि हाल के सत्र में एनएसई पर ऑक्शन वॉल्यूम में सुधार हुआ है और निफ्टी स्पॉट और फ्यूचर्स की कीमतों के बीच का अंतर कम हुआ है, लेकिन सेंसेक्स क्लोजिंग ऑक्शन में भागीदारी अभी भी तुलनात्मक रूप से कम है।

अनिश्चितता को देखते हुए, गुरुवार की एक्सपायरी से पहले सेंसेक्स कॉल ऑप्शन पर इम्प्लाइड वोलैटिलिटी तेजी से बढ़ी, जिससे पता चलता है कि ट्रेडर्स सेशन के आखिर में कीमतों में बड़े उतार-चढ़ाव की अधिक संभावना मानकर चल रहे हैं।

इसके अलावा, सीएएस के तहत, स्टॉक एक्सचेंज एक तय ऑक्शन विंडो के दौरान खरीदने और बेचने के ऑर्डर इकट्ठा करते हैं और एक सिंगल इक्विलिब्रियम प्राइस तय करते हैं जिस पर ज्यादा से ज्यादा ऑर्डर मैच हो सकें।

हालांकि, यह सिस्टम मार्केट बंद होने के समय कीमत का सही पता लगाने में सुधार के लिए शुरू किया गया था।

इस बीच, कुछ लोगों ने चेतावनी दी कि कम लिक्विडिटी के कारण सेटलमेंट प्राइस को प्रभावित करना आसान हो सकता है, खासकर अगर ऑक्शन के दौरान कुछ बड़े स्टॉक्स (हेवीवेट स्टॉक्स) में जोरदार खरीदारी या बिकवाली होती है।

उनके अनुसार, इंडेक्स के बड़े स्टॉक्स की कीमतों में मामूली बदलाव का भी सेंसेक्स के क्लोजिंग लेवल और नतीजतन, ऑप्शन सेटलमेंट पर बहुत अधिक असर पड़ सकता है।

दूसरी ओर, कुछ जानकारों का मानना ​​है कि ऐसी चिंताएं शायद बढ़ा-चढ़ाकर बताई जा रही हैं। उनका कहना है कि नए सिस्टम के तहत पहली सेंसेक्स एक्सपायरी से पहले आक्रामक पोजीशन लेने के बजाय, मंगलवार की निफ्टी एक्सपायरी के दौरान देखी गई अस्थिरता के बाद ट्रेडर्स अपना एक्सपोजर कम कर सकते हैं।

हालांकि अभी कुछ चिंताएं हैं, लेकिन जानकारों का मानना ​​है कि क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम से होने वाली कोई भी अस्थिरता अस्थायी होगी, क्योंकि समय के साथ बाजार में भागीदारी बढ़ेगी और कीमत तय करने की प्रक्रिया बेहतर होगी।

Source: IANS

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