वर्ल्ड बैंक चीफ अजय बंगा ने भारतीय विकास मॉडल की तारीफ की, पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर शेयर किया पोस्ट

नई दिल्ली, 10 अप्रैल। प्रधानमंत्री कार्यालय ने शुक्रवार को आईएएनएस की उस रिपोर्ट को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, जिसमें वर्ल्ड बैंक ने चीफ अजय बंगा ने भारत के को-ऑपरेटिव मॉडल की तारीफ की है और इस स्केलेबल ग्रोथ का एक अच्छा उदाहरण बताया। साथ ही, रोजगार सृजन को विकास की रणनीति का मूल बताया।  

पीएमओ इंडिया द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर किए गए लेख में रोजगार आधारित विकास के महत्व और भारत के विकास दृष्टिकोण की वैश्विक स्तर पर बढ़ती मान्यता के बारे में बताया है। 

बंगा ने कहा कि विकास प्रयासों को व्यक्तिगत परियोजनाओं तक सीमित न रहकर रोजगार सृजन और आर्थिक अवसरों जैसे व्यापक परिणामों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

उन्होंने कहा, “विकास कोई दान नहीं है, यह एक रणनीति है।” बंगा आगे कहा कि रोजगार सृजन विकास और स्थिरता को बनाए रखने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

वाशिंगटन में विश्व बैंक और आईएमएफ की वसंतकालीन बैठकों से पहले बोलते हुए, बंगा ने बढ़ती हुई जनसांख्यिकीय चुनौती की ओर भी ध्यान दिलाया, जिसमें उन्होंने कहा कि अगले 15 वर्षों में लगभग 1.2 अरब युवाओं के कार्यबल में शामिल होने की उम्मीद है, जबकि रोजगार सृजन उस गति से नहीं हो पाएगा।

उन्होंने रोजगार बढ़ाने के लिए तीन सूत्रीय दृष्टिकोण प्रस्तुत किया, जिसमें बुनियादी ढांचे में निवेश, व्यापार-अनुकूल शासन सुधार और वित्त तक बेहतर पहुंच शामिल है।

उन्होंने बुनियादी ढांचे, कृषि, स्वास्थ्य सेवा, विनिर्माण और पर्यटन जैसे प्रमुख क्षेत्रों को रोजगार सृजन के प्रमुख चालक के रूप बताया।

अपने स्वयं के अनुभव से उदाहरण देते हुए, बंगा ने भारत के डेयरी सहकारी मॉडल को एक सफल उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया कि कैसे प्रौद्योगिकी और संगठन ग्रामीण आजीविका में सुधार लाने और छोटे उत्पादकों के लिए बाजार पहुंच का विस्तार करने में मदद कर सकते हैं।

उन्होंने कहा, "मैं भारत में पला-बढ़ा हूं।" डेयरी क्षेत्र जैसी सहकारी संरचनाएं छोटे उत्पादकों को बेहतर बाजारों और कीमतों तक पहुंच बनाने में मदद करती हैं।

उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि पर्याप्त रोजगार के अवसर पैदा करने में विफलता वैश्विक स्तर पर बढ़ते प्रवासन दबाव और सामाजिक अस्थिरता का कारण बन सकती है।

उन्होंने रोजगार की कमी को व्यापक वैश्विक चुनौतियों से जोड़ते हुए कहा, "कल्पना कीजिए कि इसका क्या प्रभाव होगा... यदि 8 करोड़ लोग... आशा और सम्मान प्राप्त करने में सक्षम नहीं होंगे।"

Source: IANS

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