वित्त वर्ष 2026 में भारत में आया रिकॉर्ड 94.84 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश

नई दिल्ली, 28 जुलाई । भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के मामले में नया रिकॉर्ड बनाया है। सरकार ने मंगलवार को संसद में बताया कि इस दौरान देश में 94.84 अरब डॉलर का सकल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आया, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा 80.61 अरब डॉलर था।

राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि हाल के वर्षों में नेट एफडीआई में आई गिरावट भी अब सुधरने लगी है। वित्त वर्ष 2025-26 में नेट एफडीआई बढ़कर 6.95 अरब डॉलर हो गया, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह केवल 0.96 अरब डॉलर था।

मंत्री ने कहा कि हाल के वर्षों में नेट एफडीआई में उतार-चढ़ाव का मुख्य कारण विदेशी निवेशकों द्वारा बढ़ी हुई रिपैट्रिएशन (निवेश की वापसी) और डिसइन्वेस्टमेंट (निवेश निकासी) के साथ-साथ भारत से होने वाला विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (ओडीआई) है।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 में लागू किए गए उदार ओडीआई नियमों के चलते भारतीय कंपनियां विदेशों में अपने कारोबार का विस्तार कर रही हैं, जिससे वे वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बन रही हैं और लंबे समय में भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।

पंकज चौधरी ने कहा कि विदेशी निवेशकों द्वारा निवेश की वापसी का बढ़ता रुझान यह भी दर्शाता है कि भारत न केवल विदेशी पूंजी आकर्षित कर रहा है, बल्कि निवेशकों को बेहतर रिटर्न भी दे रहा है। इससे वैश्विक स्तर पर भारत की छवि एक भरोसेमंद निवेश गंतव्य के रूप में और मजबूत हुई है।

सरकार ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास सम्मेलन (यूएनसीटीएडी) की नवीनतम वर्ल्ड इन्वेस्टमेंट रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आकर्षित करने वाले देशों की वैश्विक रैंकिंग में दो स्थानों की छलांग लगाई है। वर्ष 2025 में भारत 38.89 अरब डॉलर के एफडीआई प्रवाह के साथ दुनिया का 11वां सबसे बड़ा एफडीआई प्राप्तकर्ता देश बन गया, जबकि वर्ष 2024 में 27.09 अरब डॉलर के निवेश के साथ भारत 13वें स्थान पर था।

यूएनसीटैड की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने सेवाक्षेत्र से आगे बढ़कर विनिर्माण और उन्नत उद्योगों में निवेश बढ़ाने के लिए सक्रिय नीतियां अपनाई हैं, जिससे वह वैश्विक निवेशकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण बना हुआ है।

रिपोर्ट के मुताबिक, जहां विकासशील देशों में एफडीआई प्रवाह औसतन 2 प्रतिशत और एशिया के विकासशील देशों में 3 प्रतिशत बढ़ा, वहीं भारत ने इससे कहीं बेहतर प्रदर्शन किया।

सरकार ने यह भी बताया कि वर्ष 2025 में भारत ने दुनिया की सबसे बड़ी घोषित ग्रीनफील्ड निवेश परियोजनाओं को भी आकर्षित किया। अमेरिका की अल्फाबेट इंक ने भारत में 14.5 अरब डॉलर के डेटा सेंटर निवेश की घोषणा की, जो दुनिया की सबसे बड़ी घोषित ग्रीनफील्ड परियोजना रही। वहीं, पोलैंड की हाइनफ्रा ने आंध्र प्रदेश में 4 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा कर भारत में प्रमुख विदेशी निवेशकों में अपनी जगह बनाई।

Source: IANS

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