वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत की पहली फ्लाइट-प्रूवन सैटेलाइट बैटरी को बताया 'शानदार', कहा- आयात पर कम होगी निर्भरता

नई दिल्ली, 31 जुलाई । केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को भारत में स्वदेशी रूप से विकसित पहली 'फ्लाइट हेरिटेज' प्राप्त सैटेलाइट बैटरी की उपलब्धि पर हैदराबाद स्थित स्पेस स्टार्टअप टेकमी2स्पेस की सराहना की। कंपनी की 'पावरबैंक-50' बैटरी अंतरिक्ष में सफल प्रदर्शन के बाद यह प्रतिष्ठित दर्जा हासिल करने वाली देश की पहली स्वदेशी सैटेलाइट बैटरी बन गई है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस उपलब्धि को शानदार बताते हुए वित्त मंत्री ने लिखा, "अब तक भारतीय सैटेलाइट निर्माता इस महत्वपूर्ण कंपोनेंट को अधिक कीमत और लंबी प्रतीक्षा अवधि के साथ आयात करने को मजबूर थे।"

यह उपलब्धि 18 जुलाई को लॉन्च किए गए स्काईरूट एयरोस्पेस के 'विक्रम-1' रॉकेट के पहले मिशन 'आगमन' के दौरान पावरबैंक-50 की सफल तैनाती के बाद हासिल हुई।

इस बैटरी ने 450 किलोमीटर की ऊंचाई पर रॉकेट के ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल में स्थापित कॉसमोसर्व स्पेस के प्रायोगिक पेलोड को ऊर्जा प्रदान की और पूरे मिशन के दौरान सफलतापूर्वक कार्य किया।

टेकमी2स्पेस के अनुसार, इस सफल उड़ान के बाद बैटरी को 'फ्लाइट हेरिटेज' का दर्जा मिला है। अंतरिक्ष उद्योग में यह एक महत्वपूर्ण प्रमाणन माना जाता है, जो किसी कंपोनेंट के ऑर्बिट में सफल प्रदर्शन को प्रमाणित करता है।

कंपनी ने बताया कि इस प्रमाणन से सैटेलाइट निर्माताओं, लॉन्च सेवा प्रदाताओं और बीमा कंपनियों का भरोसा काफी बढ़ेगा, क्योंकि वे आमतौर पर अंतरिक्ष में सफलतापूर्वक इस्तेमाल हो चुके हार्डवेयर को प्राथमिकता देते हैं।

कंपनी के मुताबिक, इस बैटरी पैक में हाई-एनर्जी-डेंसिटी वाली लिथियम-आयन सेल, एक स्मार्ट बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम, इंटीग्रेटेड सेल हीटर और हल्का एल्युमिनियम एनक्लोजर दिया गया है। इसे लॉन्च के दौरान होने वाले कंपन, विकिरण, निर्वात और अंतरिक्ष के अत्यधिक तापमान में भी सुरक्षित और प्रभावी ढंग से काम करने के लिए डिजाइन किया गया है।

स्टार्टअप का कहना है कि इस उपलब्धि से भारत की आयातित सैटेलाइट बैटरियों पर निर्भरता कम होगी, जो अकसर महंगी होती हैं और जिनकी खरीद में काफी समय लगता है।

स्वदेशी और उड़ान-सिद्ध ऊर्जा प्रणाली देश के तेजी से बढ़ते छोटे सैटेलाइट इकोसिस्टम को मजबूती देगी और स्टार्टअप्स, अनुसंधान संस्थानों तथा विश्वविद्यालयों के लिए सैटेलाइट विकास को अधिक किफायती बनाएगी।

टेकमी2स्पेस ने बताया कि यह कॉम्पैक्ट बैटरी 50 वॉट-घंटे से अधिक ऊर्जा संग्रहित कर सकती है, इसका वजन लगभग 380 ग्राम है और इसे क्यूबसैट तथा माइक्रोसैटेलाइट को लो-अर्थ ऑर्बिट में पांच वर्ष तक के मिशनों के लिए ऊर्जा उपलब्ध कराने हेतु डिजाइन किया गया है।

—आईएएनएस

Source: IANS

अन्य समाचार

Advertisement

Advertisement

Advertisement

Get Newsletter

Advertisement