कोलकाता भगदड़ मामले में आरोपी की पत्नी का आरोप, 'पंडाल गिरने का ऐलान

कोलकाता, 23 अक्टूबर । कोलकाता में दुर्गा पूजा पंडाल में मची भगदड़ के मामले में एक बड़ा खुलासा हुआ है। मामले में गिरफ्तार दूसरे आरोपी की पत्नी ने आरोप लगाया है कि उसके पति को चोरबागान सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने पंडाल गिरने का ऐलान करने के लिए कहा था। इसके साथ ही, घटना के बाद उसे 27 अक्टूबर तक गायब रहने की सलाह भी दी गई थी।

इस भगदड़ में 19 श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी। कोलकाता पुलिस ने शुक्रवार सुबह बाबू मजूमदार उर्फ कुशल उर्फ कालिया को गिरफ्तार किया। उस पर 17 अक्टूबर की रात उत्तर कोलकाता के दुर्गा पूजा पंडाल में कथित तौर पर भ्रामक घोषणा करने का आरोप है, जिसके बाद वहां मौजूद श्रद्धालुओं में दहशत फैल गई थी।

बाबू की पत्नी कोयल मजूमदार ने पति की गिरफ्तारी के तुरंत बाद मीडिया से बातचीत में पूजा समिति के कुछ पदाधिकारियों पर ये आरोप लगाए। कोयल ने कहा कि उनके पति पेशे से ऐप आधारित कैब चालक हैं और लंबे समय से चोरबागान सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति से जुड़े हुए हैं। उनका घर अमर बोस लेन में पंडाल के काफी नजदीक है।

उन्होंने दावा किया कि भगदड़ की स्थिति गंभीर होने के बाद पूजा समिति के कुछ पदाधिकारियों ने उनके पति को फरार होकर 27 अक्टूबर तक अंडरग्राउंड रहने की सलाह दी थी। कोयल के मुताबिक, उनके पति घटना वाली रात ही पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करना चाहते थे।

कोयल ने बताया कि उनके पति करीब 18 वर्षों से पूजा समिति से जुड़े हुए हैं, लेकिन उन्हें पहले कभी दुर्गा पूजा के दौरान सार्वजनिक घोषणाएं करने की जिम्मेदारी नहीं दी गई थी, क्योंकि वह मौखिक संवाद में विशेष रूप से अच्छे नहीं थे। उन्होंने आरोप लगाया कि घटना के समय समिति के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने उनके पति को यह घोषणा करने का निर्देश दिया कि पंडाल गिर गया है। उनके पति ने यह सोचकर घोषणा की कि इससे श्रद्धालुओं को संभावित खतरे से बचाया जा सकेगा।

कोयल ने आगे दावा किया कि घटना के अगले दिन उनके पति ने उनसे संपर्क किया और बताया कि पूजा समिति के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों ने उन्हें 27 अक्टूबर तक अंडरग्राउंड रहने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि इस दौरान उनके पति लगातार पछतावे और आत्मग्लानि से जूझ रहे थे।

इस बीच, पुलिस सूत्रों के अनुसार, घटना के बाद बाबू कुछ समय के लिए अपने घर लौटे थे, लेकिन बाद में मोबाइल फोन वहीं छोड़कर चले गए। इस मामले में बाबू मजूमदार दूसरे आरोपी हैं, जिन्हें कथित तौर पर भ्रामक घोषणा करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। इससे पहले गुरुवार को कोलकाता पुलिस ने चोरबागान सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति के कोषाध्यक्ष संजीब राहा उर्फ सेंटू को गिरफ्तार किया था। वह इस मामले में मुख्य आरोपी हैं।

घटना के समय बारिश के कारण पंडाल में पहले से ही अफरा-तफरी का माहौल था। बाहर इंतजार कर रहे श्रद्धालु अंदर जाने की कोशिश कर रहे थे, जबकि पंडाल के भीतर मौजूद लोग बारिश के कारण बाहर निकलने से हिचकिचा रहे थे। इसी दौरान पंडाल गिरने की चेतावनी देते हुए श्रद्धालुओं को तुरंत बाहर निकलने की घोषणा की गई। इस घोषणा के बाद लोगों में दहशत फैल गई और वे निकास द्वार की ओर भागने लगे। कुछ लोग बाहर निकलने के लिए प्रवेश द्वार की ओर भी बढ़े। इससे भीड़ बेकाबू हो गई और देखते ही देखते भगदड़ मच गई।

इस दर्दनाक हादसे में 19 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए। घटना के बाद पुलिस ने भगदड़ के कारणों और कथित भ्रामक घोषणा के लिए जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच शुरू की। पुलिस के अनुसार, इस मामले में अब तक नौ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच एजेंसियां घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने के साथ-साथ पूजा समिति के आयोजकों की कथित भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं।

Source: IANS

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