गैजेट रेडिएशन से सुरक्षा है बेहद जरूरी, बच्चों का मानसिक विकास हो सकता है प्रभावित

नई दिल्ली, 4 अप्रैल। आज की जीवनशैली में सारा काम गैजेट पर निर्भर हो गया है। हर वक्त हमेशा गैजेट से घिरे रहते हैं, बात चाहे ऑफिस की हो या फिर घर की। 

घर पर टीवी, एसी और फोन और ऑफिस में लगातार कंप्यूटर या फिर लैपटॉप के सामने बैठना ही पड़ता है। ऐसे में गैजेट रेडिएशन से शरीर को कई तरह के नुकसान होते हैं, जो दिखते नहीं हैं लेकिन शरीर को अंदर से हानि पहुंचाते हैं। आज के समय में रेडिएशन से सुरक्षा बड़ा मुद्दा बन चुका है। आज हम आपको गैजेट रेडिएशन से सुरक्षा के बारे में बताएंगे।

आज के समय में मोबाइल, लैपटॉप और वाई-फाई हमारे जीवन का हिस्सा बन चुके हैं। लेकिन इनका ज्यादा और गलत इस्तेमाल शरीर पर असर डाल सकता है। थोड़ी सावधानी अपनाकर आप खुद और अपने परिवार को सुरक्षित रख सकते हैं। अगर आप लैपटॉप पर काम करते हैं तो हमेशा माउस और कीबोर्ड का इस्तेमाल करें। इससे शरीर के बीच में एक सीमित दूरी बन जाती है और रेडिएशन का असर कम हो जाता है।

दूसरा, लैपटॉप को गोद में रखकर काम करने से बचें; हमेशा टेबल का इस्तेमाल करें। इससे रेडिएशन सीधा शरीर को नहीं छूती। अपने और मेज के बीच में हमेशा एक फीट की दूरी बनाकर रखें। इससे आंखें और शरीर दोनों ही स्वस्थ रहेंगे। इसके साथ ही, फोन को भी हमेशा खुद से सटाकर न रखें।

अक्सर लोग फोन को पॉकेट में रखते हैं और सोते वक्त भी अपने पास रखते हैं। इससे दिल और दिमाग दोनों को क्षति पहुंचती है। अगर घर पर वाई-फाई लगता है तो कोशिश करें कि वाई-फाई के राउटर को बाहर लगवाने की कोशिश करें। इससे घर में रेडिएशन का स्तर कम होगा और हवा भी साफ रहेगी। राउटर से निकलने वाली किरणें नींद में खलल डालती हैं और इससे मस्तिष्क की नसों पर भी हानिकारक प्रभाव पड़ता है।

सोते समय कोशिश करें कि फोन को एयरप्लेन मोड पर रखें। ऐसा करने से रेडिएशन का स्तर काफी हद तक कम हो जाता है। इसके साथ ही कोशिश करें कि बच्चों को गैजेट से दूर रखें। गैजेट के इस्तेमाल से बच्चों का मानसिक स्तर कमजोर होता है और विकास में भी बाधा होती है।

Source: IANS

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