तन-मन को शीतल कर हाई ब्लड प्रेशर कंट्रोल करता है शीतकारी प्राणायाम, इस तरह करें

नई दिल्ली, 12 अप्रैल। बदलती जीवनशैली, अनियमित दिनचर्या और असंतुलित खानपान के चलते आज हाई ब्लड प्रेशर एक आम स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है। दुनियाभर में करीब एक अरब लोग इससे प्रभावित हैं, जबकि भारत में यह हृदय रोग और स्ट्रोक का प्रमुख कारण माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, दवाओं के साथ-साथ जीवनशैली में सुधार और नियमित योग अभ्यास से ब्लड प्रेशर को नियंत्रित किया जा सकता है। खास तौर पर शीतकारी प्राणायाम एक आसान और प्रभावी श्वास तकनीक है, जो हाई ब्लड प्रेशर को कम करने में सहायक साबित हो रही है।

शीतकारी प्राणायाम योग की एक शीतल यानी ठंडक देने वाली श्वास तकनीक है। ऐसे में गर्मियों में और भी खास बन जाता है। इसमें मुंह से हवा अंदर ली जाती है, जिससे शरीर को ठंडक मिलती है। यह प्राणायाम तनाव कम करता है, ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम को संतुलित करता है और पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम की अति सक्रियता को कम करता है। अध्ययनों में पाया गया है कि नियमित अभ्यास से सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर में उल्लेखनीय कमी आ सकती है।

शीतकारी प्राणायाम के अभ्यास से सेहत को कई लाभ मिलते हैं। यह हाई ब्लड प्रेशर को कम करता है और हृदय की धड़कन को स्थिर रखता है। तनाव और चिंता घटाता है, जिससे ब्लड प्रेशर पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। शरीर में ठंडक पैदा करता है, पित्त दोष को शांत करता है और गर्मी संबंधी समस्याओं में राहत देता है। श्वास दर को धीमा करता है, ऑक्सीजन का बेहतर उपयोग होता है और फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है। सबसे अहम बात है कि इसके अभ्यास से सेहत को कोई साइड इफेक्ट नहीं पड़ता, जिसके कारण यह दवाओं के साथ पूरक चिकित्सा के रूप में सुरक्षित तरीके से रोजाना किया जा सकता है।

रिसर्च के अनुसार, शीतकारी और शीतली प्राणायाम हल्के से मध्यम हाई ब्लड प्रेशर वाले लोगों में सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर को काफी हद तक कम कर सकते हैं। यह परिवर्तन तनाव कम करने और पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम को सक्रिय करने के कारण होता है।

शीतकारी प्राणायाम के लिए आरामदायक ध्यान मुद्रा में बैठें। इस दौरान पीठ सीधी रखें और आंखें बंद कर लें। इसके बाद हाथों को घुटनों पर रखें। निचले और ऊपरी दांतों को हल्का सा दबाएं। होंठों को जितना सहज लगे उतना अलग रखें। दांतों के बीच से धीरे-धीरे सांस अंदर लें। हवा खींचने की आवाज पर ध्यान दें। सांस अंदर लेने के बाद मुंह बंद करें और नाक से धीरे-धीरे सांस बाहर छोड़ें। रोजाना 10 मिनट तक इस अभ्यास को दोहराएं। शुरुआत में 20 से 30 दिनों तक नियमित अभ्यास करें।

योग विशेषज्ञों का मानना है कि प्राणायाम जैसी सरल तकनीकें दवाओं के साथ मिलकर रक्तचाप को बेहतर नियंत्रित कर सकती हैं और हृदय संबंधी जोखिमों को कम कर सकती हैं। नियमित अभ्यास से न केवल रक्तचाप नियंत्रित होता है, बल्कि समग्र स्वास्थ्य भी सुधरता है। जो लोग हाई ब्लड प्रेशर से परेशान हैं, वे शीतकारी प्राणायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल कर स्वस्थ जीवन की ओर एक कदम बढ़ा सकते हैं, हालांकि कुछ सावधानियां बरतनी भी जरूरी हैं। हाई ब्लड प्रेशर के मरीज डॉक्टर की सलाह से ही योग शुरू करें। सर्दी, साइनस या सांस की समस्या होने पर सतर्क रहें। गर्भवती महिलाएं और गंभीर रोगी बिना विशेषज्ञ मार्गदर्शन के न करें।

Source: IANS

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