सिर्फ थकावट ही नहीं, पित्त का असंतुलन भी आंखों को पहुंचाता है नुकसान, जानें देखभाल के तरीके

नई दिल्ली, 21 अप्रैल । आंखें हमारे शरीर का सबसे अहम हिस्सा होती हैं, जिसकी देशभाल करना शरीर के बाकी अंगों की तरह ही जरूरी है।

आज के समय में सारा समय कंम्प्यूटर के सामने बैठकर निकल जाता है, जिससे आंखों में भारीपन और पानी आना साधारण समस्या है लेकिन अगर सुबह उठते ही आंखों में भारीपन, जलन और चिपचिपाहट होती है तो यह आंखों की थकावट का नहीं, बल्कि शरीर की भीतरी गड़बड़ी का संकेत हैं।

आयुर्वेद में आंखों में होने वाली जलन, भारीपन या चिपचिपाहट को शरीर के पित्त से जोड़कर देखा गया है। पित्त के असंतुलन से आंखों पर गहरा प्रभाव पड़ता है। आयुर्वेद मानता है कि यह सिर्फ नींद न पूरी होने के लक्षण नहीं बल्कि शरीर के अंदर पित्त और टॉक्सिन के बढ़ने का संकेत है। शरीर में पित्त की अधिकता होने से शरीर में गर्मी औ जलन बढ़ती है, जिसका प्रभाव आंखों पर ही पड़ता है।

इसके साथ ही देर से स्क्रीन को देखना, मोबाइल का इस्तेमाल ज्यादा करना, नींद न पूरी होना, लिवर पर अधिक दबाव महसूस होना भी इसके पीछे के मुख्य कारण हो सकते हैं। आयुर्वेद मानता है कि आंखें शरीर के पित्त से जुड़ी हैं, और पित्त शरीर के रक्त से, और रक्त पाचन और लिवर से जुड़ा है। लिवर पर पड़ता दबाव पाचन को प्रभावित करता है, पाचन रक्त को, और रक्त पित्त को प्रभावित करता है। कुल मिलाकर ये सभी चीजें मिलकर शरीर में काम करती हैं, और इसका प्रभाव आंखों पर देखने को मिलता है।

अब सवाल है कि इससे आराम पाने के लिए क्या करें। इसके लिए रात को हल्का भोजन करें, सुबह उठते ही ठंडे पानी से आंखों को धोएं, दिन में दो बार त्रिफला जल से आंखों को साफ करें, ठंडी खीरा या ककड़ी से आंखों को आराम दें, और स्क्रीन टाइम कम करें। इसके साथ आहार में विटामिन ए, सी, और ई को शामिल करें। आवंला, अनार, गाजर, शकरकंद, कद्दू, पपीता, दूध, और अंडे जैसे आहार को शामिल करें। यह आहार आंखों की थकान को कम करने में मदद करते है।

Source: IANS

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