शरीर में ऊर्जा का संतुलन बनाए रखती है महाभेद मुद्रा, जानें करने का

नई दिल्ली, 23 सितंबर । योग शास्त्रों में शरीर और मन को स्वस्थ रखने के लिए कई तरह की मुद्राओं का अभ्यास करना बताया गया है। योग के इन्हीं आसनों में से शामिल है 'महाभेद मुद्रा', जो योग के उस गहरे और सूक्ष्म आयाम से जोड़ती है, जहां शरीर, प्राण और मन एक बिंदु पर आकर मिलते हैं।

महावेध मुद्रा हठ योग की एक महत्वपूर्ण और उन्नत यौगिक क्रिया है, जिसमें 'महा' का अर्थ महान और 'वेध' का अर्थ भेदना या प्रहार करना होता है। यह मुद्रा शरीर के प्रमुख चक्रों और नाड़ियों को जाग्रत करने में मदद करती है। इसके नियमित अभ्यास से शरीर में ऊर्जा का संतुलन बनाए रखने और एकाग्रता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। यह मुद्रा विशेष रूप से योग और ध्यान का अभ्यास करने वाले लोगों के लिए उपयोगी मानी जाती है।

यह मुद्रा शरीर के तीन प्रमुख बंधों, मूलबंध, उड्डियानबंध और जालंधर बंध का समन्वय है, जो कुंडलिनी शक्ति को जागृत कर सुषुम्ना नाड़ी का भेदन करने में सहायक मानी जाती है। हठयोग प्रदीपिका और घेरंड संहिता जैसे प्राचीन ग्रंथों में इस मुद्रा को सिद्धि प्रदान करने वाली और साधक को महासिद्धि की ओर ले जाने वाली बताया गया है।

यह न केवल मानसिक शांति और जीवन ऊर्जा को बढ़ाती है, बल्कि साधक के व्यक्तित्व में एक अलौकिक प्रभाव का संचार करती है। यह मूलाधार चक्र को सक्रिय कर कुंडलिनी शक्ति को जागृत करने में सहायक है। इसके नियमित अभ्यास से कब्ज, बवासीर और अन्य आंतरिक विकार दूर होते हैं। यह पीनियल और पीयूष ग्रंथि को प्रभावित कर हार्मोन संतुलन में सुधार करती है।

इस आसन को करने के लिए पद्मासन (कमल आसन) में सहज होकर बैठें और मेरुदंड (रीढ़ की हड्डी) को सीधा रखें। हथेलियों को जांघों के बगल में जमीन पर टिकाएं। नासिका से गहरी सांस लें, सांस को अंदर रोकें (आंतरिक कुंभक), और जालंधर बंध लगाएं। हाथों पर शरीर का भार डालकर शरीर को थोड़ा ऊपर उठाएं और नितंबों को 3 से 5 बार धीरे से जमीन पर स्पर्श कराएं। नितंबों को जमीन पर टिकाएं, फिर धीरे-धीरे बंध खोलें और सांस को बाहर छोड़ें।

गर्दन में दर्द, सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस या वर्टिगो के रोगी इस अभ्यास को न करें। उच्च रक्तचाप या हृदय रोग से पीड़ित लोग इसे करने से बचें।

Source: IANS

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