हेल्थ एंड फिटनेस - पेज 10
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में बढ़ता वजन एक बड़ी समस्या बनता जा रहा है। मोटापा सिर्फ शरीर का आकार नहीं बढ़ाता, बल्कि यह कई गंभीर बीमारियों को भी न्योता देता है।
ऑफिस में लंबे समय तक डेस्क पर बैठे रहने से कई तरह की शारीरिक और मानसिक समस्या शरीर को जकड़ने लगती हैं। ऐसी स्थिति में रोजाना समयानुसार, नियमित आहार और योगासन शरीर को इन समस्याओं से निजात दिलाने में मददगार है, योग के इन्हीं आसनों में पादहस्तासन श्रेष्ठ बताया गया है, जिसके अभ्यास से शरीर को धीरे-धीरे आराम मिलने लगता है।
शरीर को स्वस्थ रखने की बात आती है तो ज्यादातर लोग दिल, फेफड़ों और वजन पर ज्यादा ध्यान देते हैं, लेकिन किडनी की सेहत अक्सर नजरअंदाज हो जाती है, जबकि किडनी शरीर के सबसे जरूरी अंगों में से एक है, जो बिना रुके हर दिन अपना काम करती रहती है। यह खून को साफ करने, शरीर में मौजूद बेकार पदार्थों को बाहर निकालने और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाती है।
स्वस्थ शरीर के लिए रोजाना योगासन और संतुलित आहार जरूरी है। योग में गरुड़ासन एक ऐसा आसन है जो शरीर को लचीलापन और मजबूती देता है।
आज के समय में बाजार में चेहरे पर निखार लगाने के लिए तरह-तरह के महंगे प्रोडक्ट मौजूद हैं, लेकिन केमिकल युक्त होने के चलते लोग इन प्रोडक्ट्स पर भरोसा करने में हिचकिचाते है। ऐसे में वे प्राकृतिक चीजों की ओर लौट रहे है।
दिनभर ऑफिस में बैठकर रहने से पेट संबंधित समस्याएं शुरू होने लगती है। लगातार बैठने से पाचन तंत्र धीमा होता है और पेट की चर्बी बढ़ने लगती है।
फलों के राजा 'आम' को अक्सर सिर्फ स्वाद और मिठास से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन यह फल पोषण के मामले में भी काफी खास है। इसमें मौजूद कई विटामिन, मिनरल और प्राकृतिक तत्व शरीर के साथ-साथ त्वचा की सेहत के लिए भी उपयोगी माने जाते हैं।
सावन के महीने में किन चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए? जानिए मांसाहार, प्याज-लहसुन, तला-भुना भोजन और अन्य खाद्य पदार्थों से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं, आयुर्वेदिक कारण और स्वास्थ्य संबंधी सुझाव।
दफ्तर में घंटों कुर्सी पर बैठने से शरीर में अकड़न, कमर दर्द और पीठ दर्द होना आम है। इससे निजात पाने के लिए व्याघ्रासन एक सटीक, सरल और असरदार समाधान है।
क्या किसी बच्चे के बातचीत करने के ढंग से यह अनुमान लगाया जा सकता है कि आने वाले समय में उसे डिप्रेशन या एंग्जायटी जैसी मानसिक दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है? सुनने में भले ही यह बात अजीब लगे, लेकिन एक नए शोध में इस बात का खुलासा हुआ है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, बच्चे क्या बात कर रहे हैं, इससे कहीं अधिक अहम यह है कि वे किस तरह बोल रहे हैं।
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