शिवकुमार स्वामीजी को राष्ट्रपति मुर्मु की श्रद्धांजलि, कहा- वे समाज की आत्मा का स्वरूप

तुमकुरु, 1 अप्रैल। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बुधवार को कर्नाटक के तुमकुरु स्थित श्री सिद्धगंगा मठ में डॉ. श्री श्री शिवकुमार महास्वामीजी के 119वें जन्मदिन समारोह और गुरुवंदना महोत्सव में शिरकत की।  

इस अवसर पर बोलते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि श्री शिवकुमार स्वामीजी जैसे संत हमारे समाज और राष्ट्र की आत्मा का साक्षात स्वरूप हैं। उनका भौतिक शरीर 2019 में परम सत्ता में विलीन हो गया, फिर भी उनकी आध्यात्मिकता की धारा समाज और देश दोनों को सदा पोषित करती रहेगी। उन्होंने अपने आध्यात्मिक कार्यों से मानवता को समृद्ध किया। गरीबों और वंचितों की सेवा के प्रति समर्पित उनका जीवन कल्याणकारी कार्यों के माध्यम से आध्यात्मिकता को अभिव्यक्त करने का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

राष्ट्रपति ने स्वामीजी के नेक कार्यों की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए श्री सिद्धगंगा मठ की सराहना की। उन्होंने यह जानकर प्रसन्नता व्यक्त की कि मठ ने प्राथमिक विद्यालय स्तर से लेकर इंजीनियरिंग और प्रबंधन में उच्च शिक्षा तक की सुविधा प्रदान की है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि श्री शिवकुमार स्वामीजी के मार्गदर्शन में स्थापित श्री सिद्धगंगा अस्पताल आम जनता को उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करता है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि श्री सिद्धगंगा मठ समकालीन युग में सेवा और आध्यात्मिकता की सदियों पुरानी परंपरा को कायम रखते हुए उसे आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि हमारी परंपरा में ज्ञान के वरदान को अत्यधिक महत्व दिया जाता है। ज्ञान और शिक्षा व्यक्तित्व विकास और चरित्र निर्माण की बुनियाद हैं। शिक्षा ही आत्मनिर्भरता का मार्ग प्रशस्त करती है। समाज के हाशिए पर पड़े वर्गों और ग्रामीण क्षेत्रों के वंचित छात्रों को शिक्षा प्रदान करके, मठ एक समावेशी समाज के निर्माण में अमूल्य योगदान दे रहा है।

राष्ट्रपति ने कहा कि परिश्रम, जनसेवा और राष्ट्रसेवा आपस में जुड़े हुए हैं। आध्यात्मिकता जनसेवा और राष्ट्रसेवा दोनों के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करती है। कर्नाटक जनसेवा, राष्ट्रसेवा, आध्यात्मिकता और आधुनिक प्रगति के सबसे प्रभावशाली उदाहरणों का उत्कृष्ट उदाहरण है। इसके लिए कर्नाटक के परिश्रमी और प्रतिभाशाली निवासियों की प्रशंसा की जानी चाहिए। कर्नाटक के लोगों ने राष्ट्र निर्माण में निरंतर अग्रणी योगदान दिया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि कर्नाटक राष्ट्र निर्माण के एक प्रमुख केंद्र के रूप में आगे बढ़ता रहेगा।

राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्र निर्माण, परोपकार और कर्तव्य के प्रति अटूट निष्ठा के मार्ग पर चलकर ही हम शिवकुमार स्वामीजी को सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित कर सकते हैं।

Source: IANS

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