घर खरीदारों से 2,000 करोड़ की धोखाधड़ी मामले में अर्थ इंफ्रास्ट्रक्चर्स के प्रमोटर गिरफ्तार, ईडी की बड़ी कार्रवाई

नई दिल्ली, 2 जून । प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने घर खरीदारों के साथ कथित धोखाधड़ी के मामले में एम/एस अर्थ इंफ्रास्ट्रक्चर्स लिमिटेड के प्रमोटर-निदेशकों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई दिल्ली जोनल कार्यालय द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम, 2002 के तहत की गई।

गिरफ्तार किए गए आरोपियों में अवधेश कुमार गोयल, रजनीश मित्तल, अतुल गुप्ता और विकास गुप्ता शामिल हैं। इन सभी को 1 जून को गिरफ्तार में लिया गया और बाद में दिल्ली की विशेष अदालत के समक्ष पेश किया गया, जहां अदालत ने उन्हें पांच दिन की ईडी हिरासत में भेज दिया।

यह मामला तब सामने आया, जब प्रवर्तन निदेशालय ने दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा की ओर से दर्ज कई एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की। इसमें भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत कंपनी और उसके निदेशकों पर आरोप लगाए गए थे।

इसके अलावा गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ) ने भी कंपनी अधिनियम के तहत प्रमोटरों के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज की थी। दिल्ली पुलिस आर्थिक अपराध शाखा और गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय की रिपोर्टों के आधार पर यह जांच आगे बढ़ी।

जांच में सामने आया कि अर्थ इंफ्रास्ट्रक्चर्स लिमिटेड और उसकी समूह कंपनियों ने लगभग 19,425 घर खरीदारों और निवेशकों से करीब 2,004 करोड़ रुपए एकत्र किए थे। इन लोगों को आवासीय और व्यावसायिक इकाइयों की समय पर डिलीवरी के साथ-साथ सुनिश्चित रिटर्न का वादा किया गया था, लेकिन बाद में यह वादे पूरे नहीं किए गए। कई परियोजनाएं अधूरी छोड़ दी गईं और कई मामलों में खरीदारों को फ्लैटों का कब्जा भी नहीं दिया गया, जिससे हजारों लोगों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।

जांच एजेंसियों को यह भी पता चला कि एकत्र की गई राशि में से लगभग 407 करोड़ रुपए विभिन्न समूह कंपनियों और संबंधित व्यक्तियों के माध्यम से गलत तरीके से निकाल लिए गए। यह धन बाद में प्रमोटरों से जुड़ी संस्थाओं और व्यक्तियों के नाम पर चल और अचल संपत्तियां खरीदने में उपयोग किया गया, जिसे कानून की भाषा में अपराध की आय कहा जाता है।

इससे पहले अप्रैल में प्रवर्तन निदेशालय ने दिल्ली-एनसीआर में अर्थ ग्रुप से जुड़े कई ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया था। इस दौरान करीब 6.30 करोड़ रुपए कैश और बड़ी मात्रा में आभूषण जब्त किए गए थे। इसके साथ ही कई संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज भी बरामद किए गए, जिनकी अनुमानित कीमत 100 करोड़ रुपए से अधिक बताई गई।

फिलहाल मामले की जांच जारी है और एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि निवेशकों के पैसे का पूरा उपयोग किस तरह और किन माध्यमों से किया गया तथा इसमें और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं।

Source: IANS

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