नौसेना का नया समुद्री प्रहरी ‘महेंद्रगिरि’, समुद्री बेड़े में होगा शामिल
स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट महेंद्रगिरि (एफ-38) भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल होने जा रहा है। इसके साथ ही नौसेना की ताकत में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ेगा।

नई दिल्ली, 6 जुलाई । स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट महेंद्रगिरि (एफ-38) भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल होने जा रहा है। इसके साथ ही नौसेना की ताकत में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ेगा। दरअसल यह युद्धपोत हथियारों से लैस एक चलता-फिरता युद्धक मंच है। महेंद्रगिरि को भारतीय नौसेना की बहुआयामी युद्ध आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
इसमें सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलें, सतह से वायु में मार करने वाली मिसाइल प्रणालियां, उन्नत इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, आधुनिक सेंसर, पनडुब्बी रोधी हथियार तथा एकीकृत कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम लगाया गया है। युद्धपोत महेंद्रगिरि पूरी तरह भारतीय विशेषज्ञता का परिणाम है। इसका डिजाइन भारतीय नौसेना के युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो ने तैयार किया है, जबकि निर्माण मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड ने किया है।
महेंद्रगिरि नौसेना का एक स्टील्थ फ्रिगेट युद्धपोत है। स्टील्थ तकनीक का अर्थ है कि यह युद्धपोत दुश्मन के रडार पर सामान्य जहाजों की तुलना में बहुत कम दिखाई देता है। इसके ढांचे, बाहरी डिजाइन और विशेष तकनीकों को इस प्रकार विकसित किया गया है कि इसकी रडार पहचान क्षमता न्यूनतम रहे। युद्ध की स्थिति में यह विशेषता इसे सामरिक बढ़त प्रदान करती है। 11 जुलाई को विशाखापत्तनम में आयोजित एक भव्य समारोह में प्रोजेक्ट-17ए श्रृंखला के छठे स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट महेंद्रगिरि (एफ-38) को औपचारिक रूप से नौसेना के बेड़े में शामिल किया जाएगा।
यह केवल एक नए युद्धपोत का कमीशनिंग समारोह नहीं है, बल्कि भारत की बढ़ती तकनीकी क्षमता, आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन और समुद्री शक्ति का भी प्रतीक है। इस युद्धपोत का नाम पूर्वी घाट की प्रसिद्ध महेंद्रगिरि पर्वतमाला के नाम पर रखा गया है। सदियों से यह पर्वतमाला शक्ति, धैर्य और अडिग संकल्प का प्रतीक रही है। उसी भावना को अपने भीतर समेटे यह युद्धपोत अब हिंद महासागर की लहरों पर भारत के सामरिक हितों की रक्षा करेगा। विशेष बात यह है कि भारतीय नौसेना के इतिहास में पहली बार किसी युद्धपोत को ‘महेंद्रगिरि’ नाम दिया गया है।
इसलिए यह पोत अपनी अलग पहचान और विरासत बनाने की शुरुआत करने जा रहा है। गौरतलब है कि एक समय था जब भारत को आधुनिक युद्धपोतों के लिए विदेशी तकनीक और डिजाइनों पर निर्भर रहना पड़ता था। आज स्थिति बदल चुकी है। महेंद्रगिरि इस बात का प्रमाण है कि भारत न केवल अत्याधुनिक युद्धपोतों का निर्माण कर सकता है, बल्कि उन्हें स्वयं डिजाइन करने की क्षमता भी रखता है। यह समुद्र में अदृश्य रहकर युद्ध में घातक साबित होता है। महेंद्रगिरि समुद्र में चुपचाप आगे बढ़ सकता है, लेकिन आवश्यकता पड़ने पर अत्यंत घातक प्रहार करने में सक्षम है। इसमें गति और सहनशक्ति का शानदार मेल है।
इस फ्रिगेट में आधुनिक कंबाइंड डीजल ऑर गैस (सीओडीओजी) प्रणोदन प्रणाली लगाई गई है। सामान्य गश्ती और लंबी समुद्री तैनाती के दौरान यह ईंधन की बचत करते हुए कुशलतापूर्वक संचालित हो सकता है, जबकि आवश्यकता पड़ने पर गैस टर्बाइन की शक्ति के साथ तेज गति भी प्राप्त कर सकता है। यही कारण है कि यह युद्धपोत लंबी दूरी तक अभियान चलाने और विभिन्न समुद्री परिस्थितियों में प्रभावी संचालन करने में सक्षम है। युद्धपोत की सबसे बड़ी विशेषता इसकी बहु-भूमिका क्षमता है।
यह एक साथ कई प्रकार के खतरों का सामना कर सकता है। यह दुश्मन के लड़ाकू विमानों को मार गिराने में सक्षम है। मिसाइल हमले के लिए तैयार है व पनडुब्बियां के खतरे से निपट सकता है। यानी यह समुद्र में एक पूर्ण युद्धक मंच के रूप में कार्य करता है। नौसेना के मुताबिक महेंद्रगिरि में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। यह आंकड़ा केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की कहानी भी कहता है।
इसके निर्माण में देशभर की बड़ी रक्षा कंपनियों के साथ-साथ सैकड़ों सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों ने योगदान दिया। अनेक भारतीय उद्योगों ने इसके लिए उपकरण, प्रणालियां, सेंसर, संरचनात्मक सामग्री और अन्य आवश्यक घटक उपलब्ध कराए। इस प्रक्रिया ने हजारों लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा किए और देश के रक्षा विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को नई मजबूती प्रदान की।
नौसेना के अनुसार महेंद्रगिरि केवल युद्ध के लिए नहीं बनाया गया है। यह मानवीय सहायता एवं आपदा राहत अभियानों, खोज एवं बचाव कार्यों, समुद्री सुरक्षा गश्त और अंतरराष्ट्रीय सहयोग मिशनों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। चाहे समुद्र में फंसे लोगों को बचाना हो, किसी प्राकृतिक आपदा के बाद राहत पहुंचानी हो या हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की उपस्थिति बनाए रखनी हो, महेंद्रगिरि हर प्रकार के मिशन के लिए तैयार है।
आज हिंद महासागर क्षेत्र वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और सामरिक प्रतिस्पर्धा का प्रमुख केंद्र बन चुका है। ऐसे समय में एक मजबूत और आधुनिक नौसेना भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार है। महेंद्रगिरि जैसे अत्याधुनिक युद्धपोत भारतीय नौसेना को दूर-दराज के समुद्री क्षेत्रों में प्रभावी उपस्थिति बनाए रखने, समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और किसी भी चुनौती का मुकाबला करने की क्षमता प्रदान करते हैं। अपने आदर्श वाक्य ‘माइटी–मैजेस्टिक–मैचलेस’ को चरितार्थ करते हुए महेंद्रगिरि आने वाले दशकों तक हिंद महासागर की लहरों पर भारत की शक्ति, सुरक्षा और गौरव का प्रतिनिधित्व करेगा।
Source: IANS

