झारखंड की आदिवासी नेत्री निशा भगत की लाइव खुदकुशी की घटना पर बढ़ा सियासी तापमान, भाजपा ने सीएम से मांगा जवाब
आदिवासी नेत्री निशा भगत के फेसबुक पर लाइव आकर खुदकुशी की घटना पर राज्य का सियासी तापमान बढ़ गया है।
रांची, 6 नवंबर । आदिवासी नेत्री निशा भगत के फेसबुक पर लाइव आकर खुदकुशी की घटना पर राज्य का सियासी तापमान बढ़ गया है। भाजपा नेताओं ने इस घटना को लेकर राज्य सरकार और पुलिस-प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। भाजपा ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से सामने आकर जवाब देने और निशा भगत की ओर से जिम्मेदार ठहराए गए लोगों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने की मांग की है।
झारखंड के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि जनजातीय समाज के हक-अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाली युवा नेत्री ने अपने फेसबुक लाइव में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, पिठोरिया थाना प्रभारी और अजय तिर्की का नाम लिया था। बयान में आरोप लगाया गया है कि मुख्यमंत्री के इशारे पर कुछ लोग आदिवासियों की जमीन पर कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि निशा भगत की ओर से जिन लोगों को जिम्मेदार बताया गया है, उनकी गिरफ्तारी और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने भी इस घटनाक्रम में पुलिस-प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि निशा भगत ने घटना से पहले फेसबुक लाइव के माध्यम से अपनी परेशानी और आशंका जाहिर की थी। उनके अनुसार, लाइव वीडियो को बड़ी संख्या में लोगों ने देखा था। इसके बावजूद पुलिस समय रहते मौके पर नहीं पहुंची।
आदित्य साहू ने कहा कि पुलिस चाहती तो तत्काल कार्रवाई कर निशा भगत को सुरक्षित बाहर निकाल सकती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस की तत्परता रहती तो शायद आज उनकी जान बचाई जा सकती थी। साहू ने निशा भगत को संघर्षशील नेत्री बताते हुए कहा कि वह अन्याय और अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाती थीं। उन्होंने यह भी कहा कि लाइव वीडियो में जिन लोगों के व्यवहार और कथित बयानों से निशा भगत आहत होने की बात कह रही थीं, उनकी पहचान कर जांच की जानी चाहिए।
केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने घटना पर दुख जताते हुए कहा कि निशा भगत ने अपने फेसबुक लाइव में हेमंत सोरेन सरकार और जमीन के कारोबार से जुड़े लोगों पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा कि सामाजिक स्तर पर सक्रिय रहने वाली एक आदिवासी बेटी को किन परिस्थितियों से गुजरना पड़ा, इसकी जांच होनी चाहिए।
संजय सेठ ने झारखंड में पहले भी आदिवासी महिलाओं से जुड़े कुछ मामलों का जिक्र किया। उन्होंने रूपा तिर्की, पुष्पा टोप्पो और एक पहाड़िया युवती के मामले उठाते हुए कहा कि इन घटनाओं में न्याय को लेकर अब भी सवाल हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में महिलाओं की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।
केंद्रीय मंत्री ने मांग की कि निशा भगत ने अपने लाइव वीडियो में जिन लोगों के नाम लिए हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री से सामने आकर पूरे मामले पर बयान देने को कहा। सेठ ने यह भी कहा कि यदि राज्य सरकार मामले का संज्ञान नहीं लेती है, तो न्यायालय को स्वतः संज्ञान लेकर जांच पर विचार करना चाहिए।
Source: IANS