हैदराबाद अवैध सरोगेसी रैकेट: ईडी ने 29.76 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त

हैदराबाद, 10 मार्च। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के हैदराबाद क्षेत्रीय कार्यालय ने अवैध सरोगेसी रैकेट मामले में बड़ी कार्रवाई की है। ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत 29.76 करोड़ रुपए मूल्य की पचास अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया है।

यह रैकेट डॉ. पचीपल्ली नम्रता उर्फ ​​अथलुरी नम्रता द्वारा यूनिवर्सल सृष्टि फर्टिलिटी एंड रिसर्च सेंटर के नाम से चलाया जा रहा था।

ईडी ने मंगलवार को एक बयान में कहा कि जब्त की गई संपत्तियां जमीन के टुकड़े, फ्लैट और एक अस्पताल के रूप में हैं, जो डॉ. नम्रता और उनके बेटों के नाम पर हैं, और इन संपत्तियों का वर्तमान बाजार मूल्य लगभग 50 करोड़ रुपए है।

केंद्रीय एजेंसी ने हैदराबाद के गोपालपुरम पुलिस स्टेशन में धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक साजिश, अवैध सरोगेसी और बाल तस्करी के कई मामलों में दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की।

ईडी ने बताया कि डॉ. नम्रता अपने क्लिनिक, कर्मचारियों और एजेंटों के साथ मिलकर चलाए जा रहे सरोगेसी रैकेट के जरिए निःसंतान दंपतियों को नवजात शिशु मुहैया करा रही थीं।

पीएमएलए की जांच में पता चला कि डॉ. नम्रता सरोगेट मां के जरिए बच्चा पैदा कराने का वादा करके निःसंतान दंपतियों से मोटी रकम वसूलती थीं। प्रक्रिया को असली दिखाने के लिए उनके युग्मकों को सरोगेट मां में प्रत्यारोपित किया जाता था। हालांकि, नवजात शिशु गरीब और कमजोर माता-पिता से लिए जाते थे जो बच्चे का पालन-पोषण करने में असमर्थ थे और गर्भपात कराना चाहते थे।

एजेंसी के अनुसार, एक गिरोह में एजेंटों और उप-एजेंटों का हाथ था जो गरीब और जरूरतमंद गर्भवती महिलाओं को बहला-फुसलाकर बच्चे के जन्म के तुरंत बाद उसे त्यागने के लिए राजी करते थे।

जांच में यह भी पता चला कि डॉ. नम्रता एक बच्ची के लिए लगभग 3.5 लाख रुपए और एक बच्चे के लिए 4.5 लाख रुपए लेती थीं। ये प्रसव उनके विशाखापत्तनम स्थित अस्पताल में होते थे, क्योंकि सिकंदराबाद स्थित उनके अस्पताल का लाइसेंस अधिकारियों द्वारा रद्द कर दिया गया था। इसके अलावा, नगर निगम को भेजी गई जन्म रिपोर्टों में उन्होंने जैविक माता-पिता के बजाय निःसंतान दंपतियों के नाम दर्ज करवाए थे।

ईडी की जांच में पता चला कि वह 2014 से इस रैकेट में शामिल थी और उसके खिलाफ कई मामले दर्ज होने और अधिकारियों द्वारा उसका मेडिकल लाइसेंस निलंबित किए जाने के बावजूद उसने फर्जी सरोगेसी रैकेट जारी रखा।

जांच में यह भी पता चला कि कई दंपतियों को धोखा दिया गया और उनसे चेक और नकद के रूप में बड़ी रकम वसूल की गई। इस रकम का कुछ हिस्सा एजेंटों/उप-एजेंटों को उनके कमीशन के रूप में और तस्करी किए गए बच्चों के जैविक माता-पिता को भी दिया गया।

डॉ. नम्रथा के बैंक खातों के विश्लेषण से उनकी कार्यप्रणाली की पुष्टि हुई, जिसमें निःसंतान दंपतियों से एकत्रित धन का उपयोग एजेंटों/उप-एजेंटों को भुगतान करने के लिए किया जाता था, और वहां से तस्करी किए गए शिशुओं के जैविक माता-पिता को भुगतान किया जाता था।

पीएमएलए जांच के दौरान, डॉ. नम्रथा और उनके बेटों के नाम पर कई संपत्तियां पाई गईं और इनमें से कई संपत्तियों का भुगतान अपराध की आय से नकद में किया गया था।

इससे पहले ईडी ने डॉ. नम्रता को 12 फरवरी, 2026 को पीएमएलए की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया था और वर्तमान में वह न्यायिक हिरासत में हैं। आगे की जांच जारी है।

Source: IANS

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