पारंपरिक तमिल पोशाक में तिरुचिरापल्ली पहुंचे पीएम मोदी

चेन्नई, 11 मार्च। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार शाम तिरुचिरापल्ली पहुंचे। इस दौरान वे पारंपरिक तमिल पोशाक पहने हुए थे, जिसमें सफेद धोती (वेष्टी) और शर्ट शामिल थी। उनके इस अंदाज ने सभी का ध्यान खींचा।

प्रधानमंत्री ने दिन में पहले केरल में एक सरकारी कार्यक्रम में हिस्सा लिया और उसके बाद तमिलनाडु पहुंचे।

पीएम मोदी तिरुचिरापल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर लगभग 4:45 बजे निजी विमान से उतरे। हवाई अड्डे से वे भारतीय वायु सेना के हेलीकॉप्टर से पंचापुर के लिए रवाना हुए, जहां एक बड़ा सरकारी कार्यक्रम आयोजित किया गया है।

कार्यक्रम में प्रधानमंत्री करीब 5,650 करोड़ रुपए की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन, शिलान्यास और फ्लैग ऑफ किया। ये परियोजनाएं प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों जैसे इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया और इंडियन रेलवे द्वारा संचालित की जा रही हैं।

मुख्य पहलों में, पीएम मोदी भारतीय पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड की सिटी गैस वितरण परियोजना का शिलान्यास किया, जो नीलगिरी और एरोड जिलों में 3,680 करोड़ रुपए की लागत से विकसित की जा रही है। इस परियोजना का उद्देश्य पाइप्ड नेचुरल गैस तक पहुंच बढ़ाना और क्षेत्र में स्वच्छ ऊर्जा अवसंरचना को प्रोत्साहित करना है।

प्रधानमंत्री इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के मणाली (चेन्नई) में स्थापित लुब्रिकेंट तेल निर्माण संयंत्र का भी राष्ट्र को समर्पित किया, जिसकी लागत 1,490 करोड़ रुपए है। यह सुविधा भारत के ऊर्जा क्षेत्र को मजबूत करने और औद्योगिक क्षमता बढ़ाने में मदद करेगी।

इसके अलावा, पीएम मोदी प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बने 89 ग्रामीण रास्तों (कुल 370 किलोमीटर) का उद्घाटन किया, जिससे तमिलनाडु के कई हिस्सों में कनेक्टिविटी सुधरेगी। उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग 81 पर गंगाइकुंडा चोलापुरम के पास ग्रीनफील्ड बायपास का शिलान्यास किया।

कार्यक्रम के दौरान, प्रधानमंत्री ने दो अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनें, दो एक्सप्रेस ट्रेनें और एक पैसेंजर ट्रेन सेवा को फ्लैग ऑफ किया, जिससे राज्य में रेलवे कनेक्टिविटी मजबूत होगी।

सरकारी कार्यक्रम के बाद, पीएम मोदी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) द्वारा आयोजित एक जनसभा को भी संबोधित किया।

प्रधानमंत्री पहले भी तमिलनाडु की यात्राओं के दौरान पारंपरिक तमिल पोशाक पहनते रहे हैं, जो तमिल संस्कृति और विरासत के प्रति सम्मान के रूप में देखा जाता है।

Source: IANS

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