चीनी की कीमतें वैश्विक मांग-आपूर्ति की गतिशीलता से निर्धारित होती

नई दिल्ली, 22 सितंबर । केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवार को कहा कि चीनी सहित कृषि उत्पादों की कीमतें अब मुख्य रूप से वैश्विक मांग और आपूर्ति के आधार पर तय होती हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था के मौजूदा दौर में सरकारों की भूमिका इनकी कीमतें निर्धारित करने में सीमित रह गई है।

नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड (एनएफसीएसएफ) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में गडकरी ने यह टिप्पणी उस समय की, जब विभिन्न राज्यों के मंत्री और उद्योग प्रतिनिधि चीनी के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी की मांग कर रहे थे। वर्तमान में घरेलू बाजार में चीनी की खुदरा कीमतें आपूर्ति में कमी के कारण 70 रुपए प्रति किलोग्राम से ऊपर पहुंच चुकी हैं।

गडकरी ने कहा कि वैश्वीकरण के दौर में कृषि उत्पादों की कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय बाजार का प्रभाव बढ़ गया है। उन्होंने बताया कि चीनी की कीमतें विशेष रूप से ब्राजील जैसे बड़े उत्पादक देशों के उत्पादन और आपूर्ति रुझानों से प्रभावित होती हैं, जबकि अन्य कृषि उत्पादों की कीमतें भी वैश्विक बाजार के प्रमुख उत्पादक देशों की स्थिति के अनुसार बदलती रहती हैं।

उन्होंने कहा, "हम अब वैश्विक अर्थव्यवस्था का हिस्सा हैं और ऐसी स्थिति में कोई भी सरकार कृषि उत्पादों की कीमतें तय नहीं कर सकती, भले ही वह ऐसा करना चाहे।" गडकरी ने कहा कि व्यावहारिक परिस्थितियां अक्सर प्रशासनिक रूप से तय कीमतों की मांगों को लागू करना कठिन बना देती हैं।

भारत की प्रतिस्पर्धात्मक चुनौतियों का उल्लेख करते हुए गडकरी ने कहा कि ब्राजील को बड़े पैमाने पर मशीनीकृत खेती का लाभ मिलता है, जिससे वहां उत्पादन लागत काफी कम रहती है।

उन्होंने बताया कि ब्राजील में चीनी उत्पादन की लागत लगभग 23 रुपए प्रति किलोग्राम है, जबकि भारत में यह लागत 33-34 रुपए प्रति किलोग्राम के आसपास है। ऐसे में जब ब्राजील में अधिशेष उत्पादन होता है, तो उसका दबाव वैश्विक बाजार के साथ भारतीय बाजार पर भी पड़ता है।

गडकरी ने किसानों की आय और कृषि क्षेत्र की चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि कई क्षेत्रों में किसानों की परेशानी का मूल कारण यह है कि खेती अनेक मामलों में आर्थिक रूप से पर्याप्त लाभदायक नहीं रह गई है।

उन्होंने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए केवल पारंपरिक खेती पर निर्भर रहने के बजाय नवाचार और विविधीकरण को बढ़ावा देना होगा। स्थायी समाधान तभी संभव है जब कृषि से जुड़े नए आय स्रोत विकसित किए जाएं।

चीनी उद्योग के भविष्य पर बोलते हुए गडकरी ने कहा कि केवल चीनी उत्पादन पर निर्भर रहना अब व्यवहारिक रणनीति नहीं है। उन्होंने चीनी मिलों और उद्योग जगत को बायोमास उपयोग, पराली-आधारित उत्पाद, ऑर्गेनिक खाद और अन्य वैल्यू एडेड उत्पादों पर अधिक ध्यान देने की सलाह दी।

उन्होंने कहा कि ऐसे उत्पाद चीनी मिलों और किसानों दोनों के लिए अतिरिक्त राजस्व के स्रोत बन सकते हैं और उद्योग को दीर्घकालिक स्थिरता प्रदान कर सकते हैं।

गडकरी ने संकेत दिया कि बदलते वैश्विक बाजार में भारतीय चीनी उद्योग को प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए पारंपरिक व्यवसाय मॉडल से आगे बढ़कर नवाचार, विविधीकरण और वैकल्पिक आय के अवसरों को अपनाना होगा। इससे किसानों की आय बढ़ाने और उद्योग को अधिक टिकाऊ बनाने में मदद मिल सकती है।

Source: IANS

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