जेपीएससी-जेएसएससी आंदोलन के सोशल मीडिया पोस्ट भी जांच के घेरे में,

रांची, 23 अगस्त । झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ चल रहे छात्र आंदोलन के बीच अब सोशल मीडिया पर पोस्ट की जा रही सामग्री भी पुलिस जांच के दायरे में आ गई है। रांची साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन ने ‘जेपीएससी रिफॉर्म मंच’ के नाम से संचालित एक्स अकाउंट के बारे में विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराने के लिए एक्स कॉर्पोरेशन को नोटिस जारी किया है। पुलिस ने यह नोटिस भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी बीएनएसएस की धारा 94 के तहत जारी किया है।

साइबर पुलिस के नोटिस के मुताबिक, अकाउंट का इस्तेमाल झारखंड सरकार की कार्रवाई और छात्र आंदोलन से जुड़े मामलों को लेकर कथित तौर पर गलत और भ्रामक सूचनाएं, वीडियो और तस्वीरें प्रसारित करने के लिए किया जा रहा है। पुलिस ने कहा कि इस मामले में आपराधिक जांच चल रही है और अकाउंट के पीछे मौजूद व्यक्ति या व्यक्तियों की पहचान तथा उनकी गतिविधियों से जुड़ी जानकारी हासिल करना जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह कार्रवाई रांची के कोतवाली थाना में दर्ज कांड संख्या 183/2026, दिनांक 21 अगस्त 2026, से जुड़ी है।

नोटिस में विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज मामले का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए ऐसी सामग्री प्रसारित की जा रही है, जिससे आम लोगों में भय, भ्रम या अशांति की स्थिति उत्पन्न होने की आशंका है। साइबर पुलिस ने नोटिस में अकाउंट से जुड़े कई पोस्ट को जांच का आधार बनाया है। इनमें एक पोस्ट में कथित तौर पर यह दावा किया गया कि ‘सरकार ने छात्रों के साथ धोखा किया है’। पुलिस के अनुसार, इस पोस्ट के साथ प्रसारित वीडियो में ‘जेएमएम के गुंडे छात्रों को धमका रहे हैं’ जैसी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है।

पुलिस ने इसे जानबूझकर लोगों में भय और असंतोष पैदा करने वाली सामग्री के रूप में दर्ज किया है। एक अन्य पोस्ट में पुलिस पर कथित तौर पर छात्रों के खिलाफ अत्याचार करने और सरकार की कार्रवाई को लेकर भ्रामक जानकारी फैलाने का आरोप लगाया गया है। नोटिस में कहा गया है कि ऐसी सामग्री से सरकारी अधिकारियों और आम जनता को यह विश्वास हो सकता है कि राज्य सरकार छात्रों के हितों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। पुलिस ने इसे जांच के दौरान महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य माना है।

एक अन्य पोस्ट में कथित तौर पर ‘आदिवासी राज्य में सरकार आदिवासियों को मार रही’ जैसी टिप्पणी की गई है। साइबर पुलिस ने इसे संवैधानिक सरकार और प्रशासन की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाली कथित मानहानिकारक सामग्री के रूप में भी जांच के दायरे में रखा है। नोटिस में इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से कथित आपत्तिजनक सामग्री के प्रसारण और ऐसी सामग्री के जरिए सामाजिक एवं सांप्रदायिक तनाव पैदा करने की आशंका का भी उल्लेख किया गया है।

पुलिस ने संबंधित सोशल मीडिया कंपनी से अकाउंट धारक की पहचान से जुड़ी जानकारी मांगी है। साइबर पुलिस ने एक्स से अकाउंट धारक का पूरा नाम, आवासीय पता, संपर्क नंबर और वैकल्पिक ई-मेल सहित रजिस्ट्रेशन डिटेल उपलब्ध कराने को कहा है। इसके अलावा 10 अगस्त 2026 और उससे पहले की अवधि के लॉग-इन और लॉग-आउट रिकॉर्ड, सटीक तारीख और समय तथा उपलब्ध आईपी एड्रेस की जानकारी भी मांगी गई है। जांच एजेंसी ने अकाउंट को संचालित करने के लिए इस्तेमाल किए गए उपकरणों की जानकारी भी मांगी है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर छात्र आंदोलन लगातार राजनीतिक मुद्दा बना हुआ है। आंदोलनकारी छात्र सरकार पर भर्ती परीक्षाओं में हुई अनियमितताओं के खिलाफ कार्रवाई करने और अदालत में अपने फैसलों का मजबूती से बचाव करने की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर, सरकार की कार्रवाई और आंदोलन से जुड़े सोशल मीडिया पोस्ट अब पुलिस की डिजिटल जांच के दायरे में आने लगे हैं।

Source: IANS

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