महाराष्ट्र एफडीए की बड़ी कार्रवाई, सिप्ला फार्मा का पुणे स्थित सीएंडएफ बिक्री लाइसेंस रद्द

मुंबई, 28 अगस्त । महाराष्ट्र में अन्न एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने दवा कंपनी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। रिएक्टिन प्लस टैबलेट्स मामले में सिप्ला फार्मा एंड लाइफ साइंसेज लिमिटेड का पुणे स्थित दवा बिक्री (सीएंडएफ) लाइसेंस रद्द कर दिया गया है।

अन्न एवं औषधि प्रशासन, महाराष्ट्र राज्य की ओर से जारी प्रेस नोट के अनुसार, मेसर्स सिप्ला फार्मा एंड लाइफ साइंसेज लिमिटेड, वडकी, पुणे का कैरी एंड फॉरवर्डिंग (सीएंडएफ) औषधि बिक्री लाइसेंस 27 अगस्त 2026 से रद्द कर दिया गया है।

एफडीए ने बताया कि औषधियों की गुणवत्ता, सुरक्षा और कानूनी वितरण सुनिश्चित करने के लिए लगातार निरीक्षण और कड़ी प्रवर्तन कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में पुणे की कंपनी के खिलाफ यह निर्णायक कार्रवाई की गई है।

प्रशासन के अनुसार, जून 2026 के आसपास वडकी, जिला पुणे स्थित मेसर्स सिप्ला फार्मा एंड लाइफ साइंसेज लिमिटेड के मुख्य गोदाम पर निरीक्षण कार्रवाई की गई थी। इस दौरान रिएक्टिन प्लस टैबलेट्स की पैकेजिंग पर गंभीर अनियमितता पाई गई।

जांच में पाया गया कि रिएक्टिन प्लस टैबलेट्स, जो कि शेड्यूल-एच औषधि है यानी डॉक्टर की पर्ची पर मिलने वाली दवा है, उसकी पैकेजिंग पर 'एनाल्जेसिक एवं एंटीपायरेटिक' (दर्द निवारक एवं बुखार कम करने वाली) का बिना अनुमति दावा/विज्ञापन किया गया था।

यह विज्ञापन औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 तथा नियम, 1945 के प्रावधानों के विपरीत पाया गया। इसके चलते विभाग ने 11.19 लाख रुपए मूल्य का स्टॉक जब्त किया था।

एफडीए ने कहा कि इस प्रकार के विज्ञापन से नागरिकों में डॉक्टर की सलाह के बिना दवा लेने यानी सेल्फ-मेडिकेशन की प्रवृत्ति बढ़ने की संभावना रहती है, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरा उत्पन्न हो सकता है। इसी कारण प्रशासन ने संबंधित संस्था को मिसब्रांडेड (भ्रामक लेबल/दावे वाली) औषधि रिएक्टिन प्लस टैबलेट्स का स्टॉक बाजार से वापस मंगाने (री-कॉल) के निर्देश जारी किए थे।

हालांकि, जांच में पाया गया कि संस्था ने इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई और प्रशासन के निर्देशों का पूर्ण रूप से पालन नहीं किया। निर्देशों का पालन न करने और आगे की जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद एफडीए ने सख्त रुख अपनाते हुए कंपनी का सीएंडएफ लाइसेंस रद्द करने का फैसला लिया।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों के खिलाफ इसी तरह की कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी ताकि नागरिकों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण दवाएं मिल सकें।

Source: IANS

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