उज्जैन: ब्रह्मांड के राजा महाकाल को अर्पित हुई पहली राखी, लगा सवा लाख लड्डुओं का भोग

उज्जैन, 28 अगस्त । सावन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर रक्षाबंधन का पर्व शुक्रवार को विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में बड़े ही हर्ष और उल्लास के साथ मनाया गया। बाबा महाकाल को ब्रह्मांड का राजा माना जाता है और परंपरा के अनुसार सबसे पहली राखी उन्हीं को अर्पित की जाती है।

शुक्रवार तड़के भस्म आरती के दौरान महाकालेश्वर मंदिर में रक्षाबंधन की विशेष परंपरा निभाई गई। इससे पहले भगवान महाकाल का पंचामृत अभिषेक किया गया। पंचामृत में दूध, दही, घी, शहद और शर्करा से बाबा का अभिषेक कर उनका भांग, चंदन और सूखे मेवों से आकर्षक शृंगार किया गया। इसके बाद बाबा को नए वस्त्र धारण कराए गए और भव्य रूप से सजाया गया।

भस्म आरती की शुरुआत होते ही महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा को भस्म रमाई गई। मान्यता है कि भस्म अर्पित किए जाने के बाद बाबा महाकाल निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं। बाबा की इस आरती में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन की पावन नगरी पहुंचते हैं।

इसी दौरान पुजारी परिवार की महिलाओं द्वारा विशेष रूप से तैयार की गई राखी बाबा महाकाल को अर्पित की गई। मान्यता है कि जब तक बाबा महाकाल को राखी नहीं बंधती, तब तक उज्जैन में रक्षाबंधन का पर्व शुरू नहीं माना जाता। बाबा को राखी बांधने के बाद ही शहर में बहनें अपने भाइयों को राखी बांधती हैं।

इस अवसर पर मंदिर में सवा लाख लड्डुओं का विशेष भोग भी लगाया गया। भस्म आरती के बाद बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं में यह लड्डू प्रसाद के रूप में वितरित किया गया। पूरा मंदिर परिसर "जय श्री महाकाल" और "हर हर महादेव" के जयकारों से गूंज उठा।

रक्षाबंधन के इस पावन अवसर पर उज्जैन में भक्तों का तांता लगा रहा। दूर-दराज से आए हजारों श्रद्धालुओं ने भस्म आरती में शामिल होकर बाबा महाकाल के दर्शन किए और रक्षाबंधन पर्व की शुरुआत बाबा के आशीर्वाद से की।

Source: IANS

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