AIMJ ने उत्तराखंड मदरसा निर्णय पर खड़े किए सवाल, साजिद रशीदी के

बरेली, 11 जुलाई । ऑल इंडिया मुस्लिम जमात (एआईएमजे) के प्रमुख मौलाना शहाबुद्दीन ने जम्मू-कश्मीर से संबंधित ढाका मैप विवाद, वंदे मातरम व राष्ट्रगान पर जारी नई गाइडलाइंस, महिलाओं को लेकर मौलाना साजिद रशीदी द्वारा दिए गए विवादित बयान और उत्तराखंड कैबिनेट द्वारा मदरसों की सरकारी ग्रांट बंद करने के फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

न्यूज़ एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में मौलाना शहाबुद्दीन ने कहा कि उत्तराखंड सरकार लगातार मदरसों को निशाना बना रही है। सरकार चाहती है कि मुस्लिम समुदाय की नई पीढ़ी इस्लामी धार्मिक शिक्षा से वंचित रहे। वहां की सरकार ने पहले 250 मदरसों को बंद करने का काम किया, फिर मदरसा एजुकेशन बोर्ड को समाप्त कर दिया और इसके बाद मदरसों को मिलने वाली सरकारी ग्रांट भी खत्म कर दी। प्रदेश सरकार चाहती है कि मुसलमान अरबी, फारसी और उर्दू की शिक्षा व्यवस्था से वंचित रहें, ताकि यह कौम तरक्की न कर सके।

मौलाना ने कहा कि पीओके भारत का अंग है। बहुत जल्‍द यह भारत के हिस्‍से में शामिल होगा। जम्‍मू-कश्‍मीर की जनता को अमन-शांति पसंद है। अनुच्‍छेद 370 हटने के बाद से जम्‍मू-कश्‍मीर में विकास के कार्य हुए हैं। राजनीतिक पार्टियां और वहां की जनता चाहती है कि जम्‍मू-कश्‍मीर को राज्‍य का दर्जा दिया जाए। खासकर डॉक्‍टर फारूक अब्‍दुल्‍ला और उनके बेटे उमर अब्‍दुल्‍ला, मौलवी मीरवाइज जैसे राजनीतिक नेता लगातार राज्‍य का दर्जा देने की मांग करते रहे हैं। राज्‍य का दर्जा मिलने के बाद विकास में तेजी आएगी।

उन्‍होंने कहा कि केंद्र सरकार को चाहिए कि जम्‍मू-कश्‍मीर को राज्‍य का दर्जा दे, यह कश्‍मीर के हित में होगा।

महिलाओं पर मौलाना साजिद रशीदी की विवादित टिप्पणी मौलाना शहाबुद्दीन ने कहा कि इस्‍लाम में लड़के और लड़कियों को 14-15 साल में बालिग होने की बात कही गई है। इसका मतलब यह है कि अब बच्‍चे समझदार हो गए हैं और अपने फैसले खुद से करें। जो लोग ऐसा सोचते हैं कि इस उम्र में लड़कियों की शादी कर दो, नहीं तो इनके साथ दुष्‍कर्म हो जाएगा, यह गलत और शर्मिंदगी वाली बात है।

उन्‍होंने कहा कि इस तरह के बयानों की मैं निंदा करता हूं।

मौलाना शहाबुद्दीन ने कहा कि गृह मंत्रालय ने वंदे मातरम और राष्ट्रगान पर नई गाइडलाइंस जारी करते हुए इसे अनिवार्य कर दिया है। यह बयान सरकारी कार्यालयों के लिए जारी किया गया है। यह आवामी कार्यक्रम के लिए नहीं है, इसलिए इसके विरोध का कोई मतलब नहीं बनता है। जो लोग इसका गायन नहीं करना चाहते उन पर किसी प्रकार का कोई दबाव नहीं है।

 

Source: IANS

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