हाई-टेक कंपनियों के लिए बीआईएस प्रमाणन नियमों में ढील देगा भारत, सेमीकंडक्टर और एआई निवेश को मिलेगा बढ़ावा: पीयूष गोयल

टोक्यो/नई दिल्ली, 25 अगस्त । केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को कहा कि भारत सरकार देश में विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने की इच्छुक सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और अन्य उच्च-प्रौद्योगिकी कंपनियों के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) प्रमाणन संबंधी नियमों को सरल बनाने की दिशा में काम कर रही है। सरकार का उद्देश्य निवेशकों की नियामकीय चुनौतियों को कम करना और भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करना है।

टोक्यो में आयोजित सेमीकंडक्टर और एआई विषयक एक गोलमेज बैठक को संबोधित करते हुए गोयल ने कहा कि सरकार ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं में शामिल किया है और भारत में निवेश की संभावनाएं तलाश रही जापानी कंपनियों को केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से पूरा सहयोग दिया जाएगा।

उन्होंने कहा, "हम भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण केंद्र बनाना चाहते हैं।" साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार निवेशकों को उपयुक्त स्थानीय साझेदारों और निवेशकों की पहचान करने में भी मदद करेगी।

गोयल ने बताया कि उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने विशेष रूप से बीआईएस प्रमाणन प्रक्रिया को लेकर कुछ चिंताएं उठाई हैं। उनके अनुसार, उच्च-प्रौद्योगिकी विनिर्माण के लिए आवश्यक कई विशेष मशीनों, उपकरणों और घटकों को भारत में लाने के दौरान प्रमाणन से जुड़ी जटिलताओं का सामना करना पड़ता है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इन चिंताओं को गंभीरता से लेते हुए वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय और बीआईएस को एक नया ढांचा तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं, जिसका उद्देश्य ऐसे उपकरणों और घटकों के आयात तथा उपयोग को अधिक सुगम बनाना है, ताकि भारत में नई विनिर्माण इकाइयों की स्थापना में अनावश्यक देरी न हो।

उन्होंने बताया कि प्रस्तावित व्यवस्था के तहत विभिन्न स्तरों पर छूट देने की संभावना पर विचार किया जा रहा है, जिसमें विशेष क्षेत्रों, विशिष्ट कंपनियों, किसी खास उत्पाद या परियोजना के आधार पर छूट देने जैसे विकल्प शामिल हो सकते हैं।

गोयल ने कहा, "भारत लौटने के बाद हम इस ढांचे पर काम करेंगे और सामूहिक छूट, उत्पाद-आधारित छूट, परियोजना-आधारित छूट या कंपनी स्तर पर छूट जैसे विकल्पों के जरिए समाधान तलाशेंगे।"

उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भारत में उत्पादन शुरू करने वाली कंपनियों को आवश्यक उत्पाद, उपकरण और सेवाएं समय पर उपलब्ध हों तथा नियामकीय प्रक्रियाओं के कारण उनकी परियोजनाओं पर असर न पड़े।

मंत्री ने भारत और जापान के बीच बढ़ते रणनीतिक सहयोग का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंध नई प्रौद्योगिकियों, उन्नत विनिर्माण और आपूर्ति शृंखला विकास जैसे क्षेत्रों में व्यापक अवसर प्रदान करते हैं।

भारत वर्तमान में एक मजबूत सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित करने और वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनियों को आकर्षित करने पर विशेष ध्यान दे रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और चिप निर्माण क्षमता के विस्तार के लिए सरकार कई नीतिगत कदम उठा रही है।

Source: IANS

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