टिम कुक के साथ समाप्त होगा एप्पल में एक युग, कंपनी का मार्केटकैप 350

नई दिल्ली, 30 अगस्त । एप्पल के मौजूदा सीईओ टिम कुक का कार्यकाल 31 अगस्त को समाप्त हो रहा है और उनकी जगह अब जॉन टर्नस कार्यभार संभालेंगे। हालांकि, कुक कंपनी के बोर्ड एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के रूप में कार्य करते रहेंगे।

कुक का सीईओ के रूप में कार्यकाल काफी हद तक सफल रहा है। उन्होंने यह जिम्मेदारी अगस्त 2011 में स्टीव जॉब की खराब सेहत के बाद दी गई थी।

कुक के 15 वर्षों के कार्यकाल में कंपनी का मार्केटकैप 350 बिलियन डॉलर से बढ़कर 4 ट्रिलियन डॉलर से अधिक हो गया है।

इस दौरान एप्पल के शेयर की कीमत 13 डॉलर से बढ़कर 320 डॉलर के करीब पहुंच गई है, जो कि करीब 25 गुना की बढ़ोतरी को दिखाता है।

कुक की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक एप्पल को एक ऐसे बिजनेस में बदलना है जो सिर्फ हार्डवेयर तक सीमित नहीं है। ऐप स्टोर, एप्पल म्यूजिक और एप्पल पे जैसी सर्विसेज ने कंपनी को तेज ग्रोथ हासिल करने में मदद की है।

सर्विसेज सेगमेंट से अब सालाना 100 अरब डॉलर से ज्यादा की कमाई होती है और इसमें एप्पल के हार्डवेयर बिजनेस के मुकाबले ज्यादा मार्जिन मिलता है।

कुक ने एप्पल की चिप स्ट्रैटेजी में भी एक बड़ा बदलाव किया। कंपनी ने इंटेल पर अपनी निर्भरता खत्म की और एप्पल सिलीकॉन प्लेटफॉर्म के तहत मैक कंप्यूटर के लिए अपने प्रोसेसर डिजाइन करना शुरू किया।

इस बदलाव से एप्पल को परफॉर्मेंस, प्रोडक्ट डेवलपमेंट और अपने बड़े हार्डवेयर-सॉफ्टवेयर इकोसिस्टम पर ज्यादा कंट्रोल मिला।

उनके कार्यकाल में नए तरह के प्रोडक्ट्स भी आए। एप्पल ने 2015 में एप्पल वॉच लॉन्च की, जिसमें हेल्थ, फिटनेस और रोजमर्रा की कनेक्टिविटी पर फोकस किया गया था।

एक साल बाद, कंपनी ने एयरपॉड्स लॉन्च किए, जिससे वायरलेस ईयरबड्स एक आम कंज्यूमर कैटेगरी बन गए और एप्पल के लिए कमाई का एक और बड़ा जरिया तैयार हुआ।

हालांकि, कुक का सफर हमेशा आसान नहीं रहा। 2012 में लॉन्च हुए एप्पल मैप्स को शुरुआती दिनों में गलत और अधूरी जानकारी के कारण काफी आलोचना का सामना करना पड़ा था।

हाल ही में, 2023 में लॉन्च किए गए विजन प्रो मिक्स्ड-रियलिटी हेडसेट को बड़े पैमाने पर अपनाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा है, क्योंकि इसकी ज्यादा कीमत ग्राहकों के लिए एक बड़ी रुकावट बन गई है।

आखिरकार एप्पल ने अपने महत्वाकांक्षी इलेक्ट्रिक और ऑटोनॉमस व्हीकल प्रोग्राम, जिसे 'प्रोजेक्ट टाइटन' के नाम से जाना जाता था, को भी बंद कर दिया। कई सालों के डेवलपमेंट, ज्यादा लागत और कमर्शियल सफलता को लेकर अनिश्चितता के कारण कंपनी को इस प्रोजेक्ट को रोकना पड़ा।

शायद एप्पल के अगले दौर से जुड़ा सबसे बड़ा सवाल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का है। जहां माइक्रोसॉफ्ट, गूगल और ओपनएआई ने कंज्यूमर और एंटरप्राइज प्रोडक्ट्स में एआई को शामिल करने के लिए तेजी से कदम उठाए हैं, वहीं एप्पल ने ज्यादा सोच-समझकर और नपे-तुले तरीके से काम किया है, जिसमें प्राइवेसी, सॉफ्टवेयर इंटीग्रेशन और ऑन-डिवाइस कंप्यूटिंग पर जोर दिया गया है।

यह रणनीति कुक के उत्तराधिकारी, जॉन टर्नस के लिए एक बड़ी परीक्षा साबित हो सकती है। एप्पल ने अपने इकोसिस्टम में एआई क्षमताएं लाने में प्रगति की है, लेकिन कंपनी पर प्रतिद्वंद्वियों की रफ्तार का मुकाबला करने का दबाव बढ़ रहा है।

कुक की एप्पल यात्रा असाधारण फाइनेंशियल ग्रोथ, सफल नए बिजनेस और प्रोडक्ट्स, और साथ ही ऐसी कोशिशों का मिला-जुला अनुभव रही है जो उम्मीदों पर खरी नहीं उतरीं। फिर भी, एप्पल के विस्तार और बदलाव में उनके योगदान को नजरअंदाज करना मुश्किल है।

Source: IANS

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