ईरानी विदेश मंत्री ने लेबनान पर इजरायली हमलों को बताया 'क्रूर'

तेहरान, 1 मई । ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची और लेबनान की संसद के स्पीकर नबीह बेरी ने लेबनान के खिलाफ इजरायल की “आक्रामक” कार्रवाइयों की कड़ी निंदा की है।

ईरान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेताओं ने फोन पर बातचीत के दौरान लेबनान और पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात, ईरान-अमेरिका के बीच शांति वार्ता और अन्य आपसी मुद्दों पर चर्चा की।

दोनों नेताओं ने दक्षिणी लेबनान में इजरायल की “क्रूर” कार्रवाइयों को रोकने के लिए वैश्विक प्रयासों की अपील की। बयान के मुताबिक, इन हमलों में हजारों लोग मारे गए और घायल हुए हैं, कई रिहायशी इलाकों और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है, और बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं।

उन्होंने द्विपक्षीय परामर्श और समन्वय जारी रखने पर भी सहमति जताई।

अराघची ने कहा कि लेबनान के खिलाफ इजरायल की “आक्रामकता” को रोकना ईरान और अमेरिका के बीच हुए युद्धविराम समझौते का हिस्सा है, और भविष्य में किसी भी कूटनीतिक प्रक्रिया में ईरान इस मुद्दे को महत्व देगा।

वहीं, नबीह बेरी ने लेबनान में इजरायल की कार्रवाई के लिए उसे जवाबदेह ठहराने की आवश्यकता पर जोर दिया।

इजरायल और लेबनान के बीच युद्धविराम 16-17 अप्रैल की मध्यरात्रि से लागू हुआ, जो कई हफ्तों तक चली सीमा-पार झड़पों के बाद संभव हुआ। 23 अप्रैल को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि मौजूदा 10 दिन का युद्धविराम तीन हफ्तों के लिए बढ़ाया जाएगा।

एक अलग बातचीत में, अराघची ने अपने स्विस समकक्ष इग्नाज़ियो कासिस से कहा कि क्षेत्रीय समुद्री मार्गों, खासकर होर्मुज़ जलडमरूमध्य में असुरक्षा, अमेरिका और इजरायल की “आक्रामकता” का सीधा परिणाम है।

कासिस ने युद्ध समाप्त करने और क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए कूटनीति का समर्थन करने की अपनी देश की नीति दोहराई।

इसी बीच, लेबनान में अमेरिकी दूतावास ने एक बयान में कहा कि वह लेबनानी राष्ट्रपति जोसेफ औन और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच संभावित बैठक का समर्थन करता है।

गौरतलब है कि 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका ने तेहरान और अन्य ईरानी शहरों पर संयुक्त हमले किए थे, जिनमें ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अली खामेनेई, वरिष्ठ कमांडर और आम नागरिक मारे गए थे।

इसके जवाब में, ईरान ने इजरायल और मध्य पूर्व में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए और होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण कड़ा कर दिया।

ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच युद्धविराम 8 अप्रैल से लागू हुआ, जिसके बाद पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधियों के बीच लंबी वार्ताएं हुईं, लेकिन कोई समझौता नहीं हो सका। इसके बाद अमेरिका ने जलडमरूमध्य पर नाकेबंदी का ऐलान किया।

Source: IANS

अन्य समाचार

Advertisement

Advertisement

Advertisement

Get Newsletter

Advertisement