एच-1बी और एल-1 वीजा एक्सटेंशन नियम सख्त करेगा अमेरिका, भारतीय पेशेवरों पर पड़ सकता है असर
अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की एक प्रस्तावित इमिग्रेशन नीति भारतीय पेशेवरों की मुश्किलों में इजाफा कर सकती है।
वाशिंगटन, 2 नवंबर । अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की एक प्रस्तावित इमिग्रेशन नीति भारतीय पेशेवरों की मुश्किलों में इजाफा कर सकती है। इसके तहत अमेरिकी इमिग्रेशन अधिकारी एच-1बी और एल-1 वीजा धारकों के एक्सटेंशन आवेदनों पर फैसला करते समय उनकी पिछली मंजूरी को आधार मानने के लिए बाध्य नहीं होंगे। इसका सबसे ज्यादा असर भारतीय पेशेवरों पर पड़ने की आशंका है।
अमेरिका में एच-1बी वीजा के तहत रोजगार जारी रखने के लिए मंजूरी पाने वालों में करीब 79 फीसदी भारतीय मूल के हैं।
अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (डीएचएस) ने इस संबंध में 'रिमूविंग डिफरेंस टू प्रायर यूएससीआईएस डिटरमिनेशंस ऑफ एलिजिबिलिटी' नाम से प्रस्ताव पेश किया है। इस पर सार्वजनिक टिप्पणियां देने की अंतिम तारीख 13 नवंबर है। यह प्रस्ताव 14 अक्टूबर को फेडरल रजिस्टर में प्रकाशित किया गया था। इच्छुक पक्ष केवल सरकारी पोर्टल 'रेगुलेशन्स डॉट जीओवी' के माध्यम से अपनी राय और आपत्तियां दर्ज करा सकते हैं।
प्रस्ताव के तहत मौजूदा आव्रजन नियम 8 सीएफआर 214.1(सी)(5) को हटाने की बात कही गई है। इस नियम के अनुसार, यदि किसी कर्मचारी और नियोक्ता के संबंध में पहले वीजा मंजूर हो चुका है और परिस्थितियों में कोई बड़ा बदलाव, महत्वपूर्ण गलती या नई प्रतिकूल जानकारी सामने नहीं आई है, तो अधिकारी को सामान्य तौर पर पुराने फैसले का सम्मान करना होता है।
नए प्रस्ताव के लागू होने पर एच-1बी और एल-1 के अलावा ओ-1, टीएन, ई और पी श्रेणी के वीजा आवेदनों पर भी इसका असर पड़ेगा। यानी किसी कर्मचारी को पहले वीजा मिल चुका है, तो भी अगली बार एक्सटेंशन मांगने पर उसके आवेदन की नए सिरे से जांच की जा सकती है।
अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (यूएससीआईएस) के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024 में एच-1बी वीजा के करीब 3.99 लाख आवेदनों को मंजूरी दी गई। इनमें 71 फीसदी लाभार्थी भारत में जन्मे थे। वहीं, लगातार रोजगार की श्रेणी में मंजूर करीब 2.58 लाख आवेदनों में से लगभग 2.03 लाख यानी 79 फीसदी भारतीय मूल के पेशेवरों के थे। इस श्रेणी में वीजा एक्सटेंशन के आवेदन भी शामिल हैं।
डीएचएस के मुताबिक, अमेरिकी आव्रजन सेवा के पास आने वाले कुल फॉर्म आई-129 आवेदनों में एच-1बी की हिस्सेदारी 75 फीसदी से अधिक है। विभाग का अनुमान है कि इस बदलाव से हर साल करीब 2.08 लाख आवेदन प्रभावित हो सकते हैं। पिछली मंजूरी को प्राथमिकता देने की व्यवस्था खत्म होने से अतिरिक्त दस्तावेज और स्पष्टीकरण मांगने वाले नोटिस यानी रिक्वेस्ट फॉर एविडेंस (आरएफई) की दर में लगभग तीन प्रतिशत अंकों की बढ़ोतरी हो सकती है। इससे हर साल करीब 6,000 अतिरिक्त नोटिस जारी होने का अनुमान है।
विभाग के अनुसार, जिन आवेदनों पर अतिरिक्त जानकारी मांगी जाती है, उन्हें निपटाने में औसतन 64 दिन अधिक लगते हैं। यह आंकड़ा पिछले चार वित्त वर्षों के औसत पर आधारित है। डीएचएस ने इस प्रक्रिया से आवेदकों और नियोक्ताओं पर पड़ने वाली अतिरिक्त लागत करीब 1.34 लाख डॉलर सालाना आंकी है।
अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग का तर्क है कि पिछली मंजूरी को प्राथमिकता देने का मौजूदा नियम आवेदक के बजाय आव्रजन अधिकारी पर यह साबित करने की जिम्मेदारी डालता है कि पहले लिए गए फैसले से अलग निर्णय क्यों लिया जा रहा है। विभाग के मुताबिक, प्रस्तावित बदलाव से अधिकारी प्रत्येक आवेदन की परिस्थितियों के आधार पर स्वतंत्र रूप से निर्णय ले सकेंगे।
अपने पक्ष में डीएचएस ने कार्यस्थलों के निरीक्षण से जुड़े आंकड़ों का भी हवाला दिया है। विभाग के अनुसार, वित्त वर्ष 2022 से 2025 के दौरान एच-1बी एक्सटेंशन से जुड़े जिन कार्यस्थलों का निरीक्षण किया गया, उनमें नियमों के उल्लंघन और धोखाधड़ी के संयुक्त मामले करीब 22 फीसदी पाए गए। इसके मुकाबले वित्त वर्ष 2018 से 2020 के दौरान यह आंकड़ा लगभग 17 फीसदी था।
विभाग ने स्पष्ट किया, " ये आंकड़े उस दौर के हैं जब पिछली मंजूरी को प्राथमिकता देने की व्यवस्था लागू थी और उससे पहले के उस दौर के हैं जब यह व्यवस्था नहीं थी।"
हालांकि, प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि अधिकारी पुराने वीजा अनुमोदन को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं करेंगे। डीएचएस के अनुसार, "अधिकारी पहले के फैसलों पर विचार कर सकेंगे, लेकिन उनके लिए पुराने अनुमोदन को आधार बनाकर आगे बढ़ना अनिवार्य नहीं होगा।"
विभाग ने यह स्वीकार किया है कि इस बदलाव से उन कर्मचारियों और कंपनियों की योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं, जिन्होंने अमेरिका में रोजगार और कानूनी रूप से रहने की अवधि को लेकर पिछली वीजा मंजूरी के आधार पर अपने करियर और निजी जीवन से जुड़े फैसले किए हैं।
अमेरिका में पिछली वीजा मंजूरी को प्राथमिकता देने की नीति में पहले भी कई बदलाव हो चुके हैं। इसे 2004 में लागू किया गया था। वर्ष 2017 में ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान इसे समाप्त कर दिया गया था। बाद में 2021 में इसे फिर बहाल किया गया और 2024 में इसे औपचारिक रूप से आव्रजन नियमों में शामिल कर लिया गया।
Source: IANS