इस्लामाबाद में सन्नाटा, बातचीत की आहट! लेकिन भरोसे पर सवाल बरकरार

नई दिल्ली, 9 अप्रैल। "ईरान की सभ्यता को पूरी तरह से खत्म करने" की डेडलाइन से कुछ घंटे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तानी मध्यस्थता का जिक्र करते हुए सीजफायर का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि ये संघर्ष विराम अगले 2 हफ्तों तक जारी रहेगा।

इसके बाद लगा कि हालात सामान्य होंगे। पूरी दुनिया ने प्रसन्नता जाहिर की। पाकिस्तान फूला नहीं समाया, लेकिन इसके बाद इजरायल की ओर से जो किया गया और अमेरिका की ओर से जो कहा गया, उसने वर्तमान स्थिति के भरोसे को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से लेकर अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के बयान में ऐसा बहुत कुछ था जो ईरान सीजफायर के भविष्य पर सवाल खड़े करता है। इजरायल का लेबनान पर हमला, एक ही दिन में सैकड़ों को मारने का दावा और फिर खुद ट्रंप का कहना कि हिज्बुल्लाह को लेकर समझौते में कोई जिक्र नहीं है, इस समझौते पर सवाल खड़े करता है। हालांकि पाकिस्तान का कहना था कि हिज्बुल्लाह इसका अंग था।

इस सबके बीच, पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद इन दिनों एक असामान्य खामोशी में डूबी हुई है। सड़कों पर सामान्य चहल-पहल की जगह सुरक्षा बलों की मौजूदगी ने ले ली है और कई इलाकों में आवागमन सीमित कर दिया गया है। वजह है ईरान के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल का आगमन, जो एक बेहद संवेदनशील और अहम कूटनीतिक वार्ता के लिए यहां पहुंचने वाला है।

एक अस्थायी संघर्षविराम के बाद शुरू हो रही इस वार्ता से उम्मीद तो है, लेकिन उसके सफल होने को लेकर संशय भी उतना ही गहरा है। पाकिस्तान ने इस प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभाते हुए दोनों पक्षों को बातचीत की मेज तक लाने में अहम भूमिका निभाई है, जिसे उसकी कूटनीतिक सक्रियता के तौर पर देखा जा रहा है।

शहर में लागू सुरक्षा इंतजाम इस बात का संकेत हैं कि इस वार्ता को कितना संवेदनशील माना जा रहा है। खासकर डिप्लोमैटिक एन्क्लेव और सरकारी परिसरों के आसपास कड़ी निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन किसी भी संभावित खतरे या विरोध को रोकने के लिए पूरी तरह सतर्क है।

हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया के पीछे एक बड़ी चुनौती भरोसे की कमी है। ईरान के भीतर ही इस बात को लेकर शंका जताई जा रही है कि क्या यह वार्ता वास्तव में किसी ठोस समाधान तक पहुंच पाएगी या यह केवल तनाव को अस्थायी रूप से टालने का एक प्रयास भर है। पिछले अनुभवों और बार-बार संघर्षविराम उल्लंघनों के आरोप ने इस अविश्वास को और गहरा किया है।

बातचीत का दायरा केवल द्विपक्षीय मुद्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पूरे पश्चिम एशिया की स्थिरता, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पड़ सकता है। यही कारण है कि दुनिया की निगाहें इस्लामाबाद पर टिकी हैं, जहां बंद सड़कों और कड़ी सुरक्षा के बीच शांति की एक मुश्किल कोशिश जारी है।

आशंका इसलिए भी क्योंकि ईरानी संसद के स्पीकर एमबी घालिबाफ ने 10 में से तीन शर्तों के हनन का आरोप यूएस पर लगाया, तो दूसरी ओर पाकिस्तान में ईरान के एम्बेसडर, रेजा अमीरी मोगादम, ने एक्स पर एक पोस्ट डिलीट कर दी, जिसमें कहा था कि ईरान का एक डेलीगेशन गुरुवार रात यूएस के साथ बातचीत के लिए इस्लामाबाद आने वाला है।

मोगादम ने पोस्ट किया था: “इजरायली सरकार द्वारा बार-बार सीजफायर तोड़ने की वजह से ईरानी पब्लिक ओपिनियन पर शक के बावजूद... ईरान के बताए 10 पॉइंट्स पर सीरियस बातचीत के लिए ईरानी डेलीगेशन आज रात इस्लामाबाद आ रहा है।”

Source: IANS

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