इटली में हिंसक हुआ सरकार विरोधी प्रदर्शन, मेलोनी ने कहा- शांतिपूर्ण

रोम, 18 अक्टूबर । इटली में महंगाई और बिगड़ती शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ जनआक्रोश फूट पड़ा है। प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी की सरकार के विरोध में छात्र, शिक्षक और ट्रेड यूनियन सड़कों पर उतर आए हैं, रोम सहित कई शहरों में स्कूलों पर कब्जा और पुलिस से झड़पें हुई हैं।

फ्रांस-24 की र‍िपोर्ट के अनुसार, फ्रांस और स्पेन में हुए आंदोलनों से प्रेरित कई अलग-अलग विरोध प्रदर्शन इन दिनों इटली में हो रहे हैं। इन सभी का एक साझा मकसद प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की दक्षिणपंथी सरकार का विरोध है।

प्रधानमंत्री मेलोनी ने देश में हो रहे इन प्रदर्शनों की न‍िंदा की और कार्रवाई की चेतावनी देते हुए कहा क‍ि इन घटनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

मेलोनी ने सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म 'एक्‍स' पोस्‍ट पर ल‍िखा, ''शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने वाले हजारों लोगों के प्रति मेरे मन में बहुत सम्मान है। इनमें वे लोग भी शामिल हैं जो सीजीआईएल की ओर से बुलाए गए प्रदर्शन में शामिल हुए थे, जिसमें वामपंथी नेताओं ने भी हिस्सा लिया। लोग किसी भी विचार या मांग के लिए प्रदर्शन करें, लेकिन लोकतंत्र को मजबूत बनाए रखने के लिए लोगों की भागीदारी बहुत जरूरी होती है।''

पीएम मेलोनी ने कहा क‍ि इटली के कुछ अन्य शहरों में जो हुआ, उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। मिलान में पुलिस और सुरक्षा बलों पर पत्थर फेंके गए, कई अधिकारी घायल हुए और तोड़फोड़ व हिंसा की घटनाएं हुईं। हालात इतने बिगड़ गए कि जुलूस को बीच में ही रोकना पड़ा।

ट्यूरिन में कुछ लोगों को पत्थर और खिड़कियां तोड़ने वाले हथौड़ों के साथ रोका गया। वहीं बोलोन्या में हुई हिंसा और हंगामे की वजह से रेलवे स्टेशन को एहतियातन बंद करना पड़ा। कुछ असामाजिक तत्व प्रदर्शनों का फायदा उठाकर अराजकता फैलाते हैं, सुरक्षा व्यवस्था संभाल रहे लोगों पर हमला करते हैं और पूरे शहर को परेशान कर देते हैं।

उन्‍होंने पोस्‍ट में आगे ल‍िखा, ''प्रदर्शन करना हर व्यक्ति का अधिकार है, लेकिन अपने शहरों को हिंसा और आगजनी की भेंट चढ़ाना कोई अधिकार नहीं है।''

पीएम मेलोनी ने कहा, ''मैं विपक्षी दलों से फिर अपील करती हूं कि इस मुद्दे पर कोई अस्पष्टता न रखें। इन हिंसक घटनाओं की साफ और खुलकर निंदा करें और हर प्रदर्शन को शांतिपूर्ण बनाए रखने की स्पष्ट अपील करें। ऐसे दृश्य देखकर हर किसी को एकजुट होकर इसका विरोध करना चाहिए। अगर कोई इस पर चुप रहता है या हिचकिचाता है, तो उसे हिंसा के लिए एक तरह का समर्थन माना जा सकता है। ऐसे मामलों में चुप्पी स्वीकार नहीं की जा सकती।''

Source: IANS

अन्य समाचार

Advertisement

Get Newsletter