सीजफायर की उम्मीदों के चलते कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट, 7 प्रतिशत तक फिसला ब्रेंट क्रूड

नई दिल्ली, 25 मार्च। पश्चिम एशिया में युद्धविराम (सीजफायर) की उम्मीदों के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बुधवार को बड़ी गिरावट देखी गई। 

सुबह के कारोबार में ब्रेंट क्रूड वायदा में 7 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 97.18 डॉलर प्रति बैरल के इंट्राडे निचले स्तर पर पहुच गया, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड ऑयल में 6 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई और यह 86.72 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में यह गिरावट भारत के लिए राहत लेकर आ सकती है। इससे महंगाई और चालू खाता घाटा (सीएडी) पर दबाव कम हो सकता है। हालांकि, तकनीकी संकेत बताते हैं कि अभी कीमतें अहम स्तरों के आसपास हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक, पिछले हफ्ते भी कमोडिटी बाजार में गिरावट देखने को मिली थी। ब्रेंट क्रूड, जो हाल ही में 101 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया था, अब 10 प्रतिशत से ज्यादा गिरकर करीब 91 डॉलर पर आ गया है। इससे भारत के तेल आयात बिल, सीएडी और रुपए पर तत्काल दबाव कम हुआ है।

विशेषज्ञों ने बताया कि भारत के लिए कच्चे तेल की कीमत में हर 10 डॉलर प्रति बैरल का बदलाव जीडीपी के मुकाबले सीएडी को 0.3 से 0.5 प्रतिशत तक प्रभावित करता है और महंगाई (सीपीआई) को 20-30 बेसिस पॉइंट तक बढ़ा सकता है।

विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिकी कच्चा तेल फिलहाल 85 से 87 डॉलर के अहम स्तर के आसपास बना हुआ है। अगर कीमतें 92-94 डॉलर के ऊपर जाती हैं तो फिर तेजी लौट सकती है और दाम 98-100 डॉलर तक पहुंच सकते हैं। वहीं, अगर 85 डॉलर से नीचे गिरावट आती है तो कीमतें 81-82 डॉलर तक जा सकती हैं।

कुल मिलाकर, विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अहम सपोर्ट लेवल बने रहते हैं, तब तक 'गिरावट में खरीदारी' की रणनीति अपनाई जा सकती है। हालांकि, भू-राजनीतिक और आर्थिक कारणों से बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

तेल की कीमतों में हालिया गिरावट से रुपए और महंगाई को थोड़ी राहत मिल सकती है, लेकिन जोखिम अभी भी बना हुआ है। यदि तेल की कीमतें फिर से बढ़ती हैं या विदेशी निवेश में कमी आती है तो रुपए पर दबाव फिर बढ़ सकता है।

इस बीच, अमेरिका के शेयर बाजारों में गिरावट देखी गई। एसएंडपी 500 और नैस्डैक क्रमशः 0.84 प्रतिशत और 0.37 प्रतिशत गिरकर बंद हुए।

इसके विपरीत, एशियाई बाजारों में भारी तेजी देखी गई। जापान का निक्केई 225 3.26 प्रतिशत उछला, दक्षिण कोरिया का कोस्पी 3.36 प्रतिशत बढ़ा और हांगकांग का हैंग सेंग 1.30 प्रतिशत चढ़ा।

Source: IANS

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