बिजनेस - पेज 74
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर वैश्विक कमोडिटी बाजारों पर भी देखने को मिल रहा है। बुधवार के कारोबारी सत्र में घरेलू वायदा बाजार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की तीन दिवसीय बैठक बुधवार से शुरू हो गई। विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच केंद्रीय बैंक इस बार ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा।
पश्चिम एशिया में जारी संकट और उससे पैदा हुई भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं का असर भारतीय विमानन क्षेत्र की रिकवरी पर लगातार पड़ रहा है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, इस संकट का असर यात्री संख्या, उड़ानों की क्षमता और एयरलाइंस की कुल लाभप्रदता पर साफ दिखाई दे रहा है।
अमेरिका-ईरान शांति वार्ता को लेकर अनिश्चितता के बीच नकारात्मक वैश्विक संकेतों के चलते सप्ताह के तीसरे कारोबारी दिन बुधवार को भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ लाल निशान में खुला।।
सोने और चांदी की कीमतों में मंगलवार को फिर से तेजी देखने को मिली। इससे 24 कैरेट सोने का दाम 1.56 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम और चांदी का दाम 2.65 लाख रुपए प्रति किलो से अधिक हो गया है।
केंद्र सरकार ने महंगाई ट्रेक करने के लिए मंगलवार को कई बड़े बदलाव किए हैं। इसमें थोक मल्यू सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) बास्केट में वस्तुओं की संख्या बढ़ाई गई है।
अदाणी पोर्टफोलियो ने मंगलवार को घोषणा की कि उसने वित्त वर्ष 2025-26 में 1,52,967 करोड़ रुपए (16.1 अरब डॉलर) का पूंजीगत निवेश (कैपेक्स) किया, जो किसी भी भारतीय कॉर्पोरेट समूह द्वारा किया गया अब तक का सबसे बड़ा वार्षिक निवेश है। और इस तरह तेज निवेश चक्र के चलते समूह का कुल परिसंपत्ति आधार बढ़कर 7,85,098 करोड़ रुपए (82.2 अरब डॉलर) हो गया है।
आईटी शेयरों में बड़ी रैली के कारण भारतीय शेयर बाजार मंगलवार के कारोबारी सत्र में तेजी के साथ बंद हुआ। दिन के अंत में सेंसेक्स 382.50 अंक या 0.52 प्रतिशत की तेजी के साथ 74,649.84 और निफ्टी 100.95 अंक या 0.43 प्रतिशत की मजबूती के साथ 23,483.55 पर था।
भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के पंजीकरण में इस साल मई में बढ़ोतरी देखी गई है। इसकी वजह अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण ईंधन की कीमतों में इजाफा होने के चलते लोगों का इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर शिफ्ट होना है।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) आने वाली जून मौद्रिक नीति कमेटी (एमसीसी) में रेपो रेट को स्थिर रख सकता है। वहीं, कमजोर रुपया और कच्चे तेल की कीमत बढ़ने के कारण महंगाई में इजाफा होने की संभावना के चलते आउटलुक और अधिक आक्रामक होने की उम्मीद है।
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