ओडिशा में बाढ़ से 3 लोगों की मौत, 748 गांव प्रभावित
राजस्व और आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने बुधवार को बताया कि लगातार बारिश और नदियों का जलस्तर बढ़ने से आई भीषण बाढ़ के कारण ओडिशा के कई जिलों में कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई और दो लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हुए।।

भुवनेश्वर, 29 जुलाई । राजस्व और आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने बुधवार को बताया कि लगातार बारिश और नदियों का जलस्तर बढ़ने से आई भीषण बाढ़ के कारण ओडिशा के कई जिलों में कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई और दो लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हुए।
एक समीक्षा बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि भारी बारिश और बाढ़ से बालासोर, भद्रक, जाजपुर, मयूरभंज और क्योंझर जिले सबसे ज़्यादा प्रभावित हुए हैं। दोपहर तक, इन जिलों में 44 ब्लॉक, 243 ग्राम पंचायतें और 748 गांव प्रभावित हो चुके थे।
बारिश का असर सुंदरगढ़, झारसुगुड़ा, बरगढ़, नुआपाड़ा, बलांगीर, कालाहांडी, रायगढ़ा, गजपति और मलकानगिरी के कुछ हिस्सों पर भी पड़ा।
उन्होंने बताया कि क्योंझर जिले में तीन लोगों की मौत हुई। मरने वालों में फायर सर्विस का एक कर्मचारी भी शामिल है। बाढ़ के पानी में डूबने से एक नाबालिग की मौत हो गई, जबकि घर की दीवार गिरने से एक बुजुर्ग व्यक्ति की जान चली गई। फायर सर्विस के कर्मचारी चंदन पटनायक की मौत क्योंझर में पानी निकालने के काम के दौरान बिजली के एक चालू तार के संपर्क में आने से हो गई।
पुजारी ने आगे बताया कि बाढ़ से प्रभावित छह जिलों में निचले इलाकों से लगभग 30,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों और राहत केंद्रों में पहुंचाया गया है। अन्य जिलों के संवेदनशील इलाकों में रहने वाले कुछ लोगों को भी सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। जिन लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया, उन्हें पका हुआ भोजन उपलब्ध कराया गया।
मंत्री ने बताया कि बच्चों के लिए पर्याप्त बेबी फूड उपलब्ध था, जबकि राहत केंद्रों में बुज़ुर्गों और महिलाओं के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे। उन्होंने कहा कि 226 गांवों में अभी भी जल-जमाव की स्थिति बनी हुई है।
हालांकि, कई जगहों पर, खासकर बालासोर जिले में पानी का स्तर कम होने लगा है, जिससे लोग धीरे-धीरे राहत केंद्रों से अपने घरों को लौट पा रहे हैं। नदी की स्थिति की समीक्षा करते हुए उन्होंने जानकारी दी कि छत्तीसगढ़ के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश शुरू हो गई है।
फिलहाल, हीराकुंड बांध के दो गेट खुले हुए हैं और जलाशय का जलस्तर सुरक्षित संचालन सीमा के भीतर है।
Source: IANS

