दिल्ली पुलिस ने 70 करोड़ के म्यूल अकाउंट सिंडिकेट का किया भंडाफोड़, 10 गिरफ्तार
संगठित साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल करते हुए दिल्ली पुलिस के सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट के साइबर पुलिस स्टेशन ने एक 'म्यूल अकाउंट सिंडिकेट' का भंडाफोड़ किया है। यह गिरोह देश और विदेश में सक्रिय साइबर अपराधियों को कंपनियों के बैंक खाते उपलब्ध कराता था, जिनका इस्तेमाल ऑनलाइन ठगी और दूसरे साइबर अपराधों में किया जाता था।

नई दिल्ली, 28 जुलाई । संगठित साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल करते हुए दिल्ली पुलिस के सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट के साइबर पुलिस स्टेशन ने एक 'म्यूल अकाउंट सिंडिकेट' का भंडाफोड़ किया है। यह गिरोह देश और विदेश में सक्रिय साइबर अपराधियों को कंपनियों के बैंक खाते उपलब्ध कराता था, जिनका इस्तेमाल ऑनलाइन ठगी और दूसरे साइबर अपराधों में किया जाता था।
शुरुआती जांच में पता चला है कि यह रैकेट पिछले तीन-चार साल से सक्रिय था। इस दौरान देशभर में ठगी से जुड़े सैकड़ों बैंक खातों के जरिए 70 करोड़ रुपए से अधिक के लेन-देन में अपराधियों की मदद की गई।
इस कार्रवाई में गिरोह के छह मुख्य सदस्यों को गिरफ्तार किया गया। इनमें सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक का एक ब्रांच मैनेजर भी शामिल है। इसके अलावा, इंडसइंड बैंक से जुड़े चार अधिकारियों और सहयोगियों को भी पकड़ा गया और मुचलका भरवाया गया। इन पर 'नो योर कस्टमर' (केवाईसी) नियमों की अनदेखी कर फर्जी बैंक खाते खुलवाने में मदद करने का आरोप है।
जांच के दौरान पुलिस ने 248 बैंक अकाउंट किट, 38 सिम कार्ड, 22 मोबाइल, 28 फर्जी कंपनियों की रबर स्टैंप, 55 डेबिट और क्रेडिट कार्ड, 1 लाख रुपए नकद और एक कार बरामद की।
दिल्ली के बलजीत नगर स्थित पंजाबी बस्ती के एक निवासी की शिकायत के बाद पुलिस ने यह जांच शुरू की। शिकायतकर्ता ने बताया कि ठगों ने उसे ऑनलाइन 'वर्क फ्रॉम होम' का लालच दिया और रजिस्ट्रेशन व अकाउंट प्रोसेसिंग फीस के नाम पर उससे 10,000 रुपए ट्रांसफर करवा लिए। पैसे मिलने के बाद आरोपियों ने उससे संपर्क तोड़ दिया और बातचीत का पूरा रिकॉर्ड भी हटा दिया।
नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर दर्ज शिकायत पर सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट के साइबर पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई।
जांच के दौरान साइबर विशेषज्ञों ने पता लगाया कि ठगी से हासिल की गई रकम का एक हिस्सा कई बैंक ट्रांजैक्शन के जरिए 'डैमियन ट्रेडर्स' नाम की एक फर्जी कंपनी के एक्सिस बैंक के करंट अकाउंट में पहुंचा था। इसके बाद वित्तीय रिकॉर्ड, ईमेल अकाउंट और दूसरे डिजिटल सबूतों की तकनीकी जांच में पुलिस को कथित रिक्रूटर मोहित सोनी का सुराग मिला। इसके आधार पर उसे 8 जुलाई को गिरफ्तार कर लिया गया।
पूछताछ में एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ, जो साइबर अपराधियों को पहले से सक्रिय 'म्यूल' बैंक अकाउंट बनाकर उपलब्ध कराता था। जांच में पता चला कि गिरोह के सदस्य ऐसे लोगों को निशाना बनाते थे, जिन्हें आसानी से झांसा दिया जा सके। वे उनके पहचान संबंधी दस्तावेज जुटाते थे और उनका इस्तेमाल कर फर्जी प्रोप्राइटरशिप फर्म और शेल कंपनियां बनाते थे। इसके बाद बैंक अधिकारियों की कथित मिलीभगत से इन कंपनियों के नाम पर कई करंट अकाउंट खुलवाए जाते थे।
जांच के मुताबिक, इस पूरे नेटवर्क को चलाने में मुख्य समन्वयक दिशांत खन्ना की अहम भूमिका थी। आरोप है कि उन्होंने बैंक कर्मचारियों के साथ मिलकर तेजी से खाते खुलवाने का काम किया। पुलिस का यह भी आरोप है कि सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक के ब्रांच मैनेजर कुंदन कुमार ने खाते खुलवाने में मदद के बदले अवैध रूप से पैसे लिए। इनमें कुछ रकम सीधे उनके निजी बैंक खाते में भी ट्रांसफर कराई गई थी।
जांच में यह भी पता चला कि शालीमार बाग में किराए पर ली गई एक जगह पर बैंक खातों से जुड़ी पूरी किट रखी गई थी। इनमें इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी, चेक बुक, पासबुक, डेबिट कार्ड, रजिस्टर्ड सिम कार्ड और फर्जी कंपनियों की मुहरें शामिल थीं।
पुलिस के मुताबिक, इस्तेमाल के लिए तैयार ये कॉर्पोरेट बैंक अकाउंट किट भारत के अलावा दुबई और यूनाइटेड किंगडम में सक्रिय साइबर ठगी के गिरोहों को बेची जाती थीं।
शालीमार बाग में छापेमारी के बाद पुलिस ने 14 जुलाई को कथित मास्टरमाइंड दिशांत खन्ना और उसके साथी मृदुल को गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने कई अहम सामान और डिजिटल सबूत बरामद किए। इनमें व्हाट्सऐप चैट और वित्तीय लेन-देन के रिकॉर्ड भी शामिल हैं।
पुलिस का कहना है कि इन सबूतों से बैंक अधिकारियों और बिचौलियों की कथित मिलीभगत के संकेत मिले हैं। गिरफ्तार किए गए छह आरोपियों की पहचान दिशांत खन्ना (36), कुंदन कुमार (35), मोहित सोनी (26), योगेश कुमार (35), रंजीत डेमियन एक्का (41) और मृदुल (22) के रूप में हुई है। इसके अलावा, इंडसइंड बैंक से जुड़े चार अन्य लोगों को भी पकड़ा गया और उनसे मुचलका भरवाया गया। इनमें एक बैंक मैनेजर, एक डिप्टी मैनेजर, एक टेलर और एक इंश्योरेंस एजेंट शामिल हैं। इन पर इस रैकेट से जुड़े बैंक खाते खुलवाने और पैसों के लेन-देन में मदद करने का आरोप है।
जांचकर्ताओं की वित्तीय जांच में पता चला कि बरामद किए गए 248 बैंक खाते देश के 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दर्ज 156 साइबर अपराध शिकायतों से जुड़े हुए थे। इनमें दिल्ली, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, गुजरात, पंजाब, केरल, तमिलनाडु समेत कई अन्य राज्य और केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं।
पुलिस के मुताबिक, शिकायतों में 20 करोड़ रुपए से अधिक की साइबर ठगी हुई है। वहीं, बरामद किए गए बैंक खातों के जरिए 70 करोड़ रुपए से ज्यादा का लेन-देन किया गया। अधिकारियों ने अब तक करीब 56 लाख रुपए फ्रीज कर दिए हैं, जबकि विवादित कुल रकम लगभग 37 करोड़ रुपए आंकी गई है।
जांच एजेंसियां अब भारत में मौजूद एक मुख्य आरोपी और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से गिरोह को चला रहे कथित मास्टरमाइंड की तलाश कर रही हैं। दोनों फिलहाल फरार हैं। इस मामले में पुलिस ने 'लुक आउट सर्कुलर' (एलओसी) भी जारी किया है।
Source: IANS

