लखनऊ में ई-सिम एक्टिवेशन फ्रॉड का खुलासा, 70 लाख रुपए की साइबर ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़
लखनऊ पुलिस की क्राइम ब्रांच ने ई-सिम एक्टिवेशन के जरिए होने वाली साइबर ठगी के एक बड़े मामले का खुलासा करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, यह गिरोह डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लोगों को डराकर लाखों रुपए की ठगी करने वाले विदेशी साइबर अपराधियों को भारतीय मोबाइल नंबर उपलब्ध कराता था।

लखनऊ, 29 जुलाई । लखनऊ पुलिस की क्राइम ब्रांच ने ई-सिम एक्टिवेशन के जरिए होने वाली साइबर ठगी के एक बड़े मामले का खुलासा करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, यह गिरोह डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लोगों को डराकर लाखों रुपए की ठगी करने वाले विदेशी साइबर अपराधियों को भारतीय मोबाइल नंबर उपलब्ध कराता था।
इस मामले में 70 लाख रुपए की साइबर ठगी का खुलासा हुआ है, जिसमें से पुलिस ने 35 लाख रुपए की रकम फ्रीज करा दी है।
पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ की ओर से जारी प्रेस नोट के अनुसार, यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा साइबर अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान ऑपरेशन 'सीवाईवीएजेआरए' के तहत की गई। पुलिस आयुक्त लखनऊ तरुण गाबा के निर्देशन और वरिष्ठ अधिकारियों के पर्यवेक्षण में साइबर क्राइम थाना टीम ने इस मामले का खुलासा किया।
पुलिस के मुताबिक, पीड़ित व्यक्ति को साइबर अपराधियों ने फोन कर खुद को एटीएस पुणे का अधिकारी बताया था। आरोपियों ने पीड़ित को मनी लॉन्ड्रिंग और अन्य गंभीर अपराधों में शामिल होने का डर दिखाया। इसके बाद उसे करीब सात दिनों तक कथित 'डिजिटल अरेस्ट' में रखा गया। इस दौरान वीडियो कॉल और अन्य डिजिटल माध्यमों से लगातार मानसिक दबाव बनाकर उससे बैंक खातों और फिक्स्ड डिपॉजिट में जमा रकम ट्रांसफर कराई गई।
डर और दबाव में आकर पीड़ित ने कुल 70 लाख रुपए चार अलग-अलग बैंक खातों में भेज दिए। मामले की जांच के दौरान पुलिस ने तीन बैंक खातों में 35 लाख रुपए की रकम फ्रीज कराई। जांच में सामने आया कि गिरफ्तार आरोपी सुमित कुमार रावत एक अधिकृत जियो सिम विक्रेता (पीओएस एजेंट) था। उसका संपर्क एयरटेल सर्विस प्रोवाइडर के रूप में काम करने वाले ईशु यादव से हुआ था। आरोप है कि ईशु यादव ने सुमित को करीब 100 ब्लैंक एयरटेल सिम उपलब्ध कराए, जिनका अवैध तरीके से इस्तेमाल किया जाना था।
पुलिस के अनुसार, सुमित नए सिम लेने या मोबाइल नंबर पोर्ट कराने वाले ग्राहकों के पहचान दस्तावेजों और ई-केवाईसी का दुरुपयोग करता था। ग्राहकों को एक वैध सिम दिया जाता था, जबकि उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर दूसरा सिम गुप्त रूप से सक्रिय कर लिया जाता था। बाद में इन सिम को ई-सिम में बदलने के लिए एक्टिवेशन क्यूआर कोड तैयार किए जाते थे।
जांच में यह भी पता चला कि आरोपी सुमित इन सक्रिय ई-सिम को प्रवीण श्रीवास्तव को 325 रुपए प्रति सिम के हिसाब से बेचता था। प्रवीण श्रीवास्तव इन्हें टेलीग्राम के माध्यम से करीब 50 यूएसडीटी प्रति ई-सिम की दर से विदेशी साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराता था। भुगतान क्रिप्टोकरेंसी के जरिए लिया जाता था।
पुलिस ने बताया कि इन भारतीय मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल मुख्य रूप से कंबोडिया आधारित साइबर अपराधी गिरोहों द्वारा डिजिटल अरेस्ट स्कैम, निवेश धोखाधड़ी, ट्रेडिंग फ्रॉड और ओटीपी फ्रॉड जैसे अपराधों में किया जा रहा था। भारतीय नागरिकों के नाम पर जारी नंबरों के जरिए विदेशी अपराधी खुद को भारत में सक्रिय दिखाने और जांच एजेंसियों से बचने की कोशिश करते थे।
Source: IANS

