क्या कम खाने से होती है कमजोरी? एक बार में कितना भोजन लेना शरीर को देता है फायदे?

नई दिल्ली, 1 मार्च । आज भागदौड़ भरी जिंदगी में भूख लगने पर लोग कुछ भी खा लेते हैं। लोगों में आम धारणा बनी हुई है कि ज्यादा खाने से शरीर को ज्यादा ताकत मिलती है, लेकिन यह सच नहीं है। ज्यादा खाने से पेट संबंधी रोग बढ़ने लगते हैं, सेहत नहीं। आज हम आपको कम और संतुलित खाने के एक नहीं, अनगिनत लाभ बताएंगे। 

ज्यादा खाने से पेट से जुड़ी परेशानियां परेशान करने लगती हैं। ज्यादा खाना न सिर्फ पाचन की गति को मंद करता है, बल्कि पेट और पाचन तंत्र पर भी दबाव बनाता है। ऐसे में बार-बार गैस की परेशानी और पेट दर्द की शिकायत होने लगती है। डॉक्टर भी सलाह देते हैं कि हल्का और संतुलित आहार खाएं, लेकिन कम और संतुलित आहार खाने से मन और पेट दोनों नहीं भर पाते। 

कम और संतुलित आहार लेने से पेट हल्का रहता है और खाना बेहतरीन तरीके से पचता है। पाचन तंत्र पर कम दबाव पड़ता है और गैस, ब्लोटिंग और कब्ज की समस्या कम होती है। इसके साथ शरीर की ऊर्जा बचती है। भारी खाने को पचाने में शरीर को दोगुनी मेहनत करनी पड़ती है और ऐसे में शरीर सुस्ती और मोटापे का शिकार हो जाता है।

संतुलित और कम आहार शरीर में ऊर्जा और चुस्ती दोनों बनाए रखता है। कम और संतुलित आहार लेने से वजन भी नियंत्रित रहता है। वजन नियंत्रित रहने से शरीर मोटापे, डायबिटीज और हृदय रोग जैसी समस्याओं का खतरा कम हो सकता है। 

इसके अलावा, संतुलित और कम आहार लेने से मेटाबॉलिज्म तेज होता है। शोध में भी पाया गया है कि कम आहार लेने से पाचन अग्नि तेजी से खाने को पचाती है और शरीर को पूरा पोषण मिलता है।

कम और संतुलित आहार लेने से शरीर में सूजन और एसिड रिफ्लक्स का खतरा कम हो जाता है। ज्यादा भारी भोजन से शरीर में एसिड तेजी से बढ़ता है और पाचन से संबंधी परेशानी तेजी से बढ़ने लगती हैं। अब सवाल है कि कितना खाएं। 

आयुर्वेद में भोजन के सही नियम बताए गए हैं। आयुर्वेद के मुताबिक पेट को तीन भागों में भोजन देना चाहिए, यानी एक भाग ठोस और एक भाग तरल होना चाहिए और एक हिस्से को खाली रखना चाहिए। सामान्य भाषा में हमेशा 70 फीसदी खाना ही पेट को देना चाहिए, कुछ हिस्सा खाली रखना चाहिए।

Source: IANS

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