दालें और फलियां रखेंगी दिल को जवां, आयुर्वेद में बताए गए हैं असाधारण लाभ

नई दिल्ली, 19 फरवरी। खराब जीवनशैली और खान-पान की वजह से युवा भी मधुमेह, थायराइड और दिल से जुड़े रोगों से ग्रस्त हो रहे हैं।  

तनाव और काम के प्रेशर के चलते दिल और दिमाग दोनों पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। हर साल दिल की बीमारियों से पीड़ित मरीजों की मौत का आंकड़ा बढ़ रहा है, जिसमें बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक शामिल हैं। भारत सरकार लगातार बीमारी से लड़ने के लिए जागरूकता अभियान चलाती रहती है, लेकिन आयुर्वेद का मानना है कि सारी बीमारियों का इलाज आपकी किचन में है।

आयुर्वेद में दिल से जुड़ी बीमारियों के लिए तनाव और शरीर में बढ़ते आम (विषाक्त तत्व) को माना है। खान-पान में लापरवाही, पैक्ड फूड, अधिक मीठा खाना, तनाव लेना और नींद की कमी दिल के रोगों को न्योता देती है, लेकिन घर में मौजूद कुछ आसान चीजों से ही आप दिल से जुड़े रोगों से बच सकते हैं, जिसमें दालों और फलियों के सेवन को सबसे लाभकारी माना गया है। दालें और फलियां भारतीय थाली का महत्वपूर्ण भोजन है, जिसे रोजाना खाना चाहिए क्योंकि दालें कोरोनरी आर्टरी डिजीज के खतरे को कम करती हैं।

इसके अलावा दालें और फलियां में अधिक मात्रा में घुलनशील फाइबर होता है जो खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है। मानव शरीर में पहले से ही कोलेस्ट्रॉल मौजूद होता है और जब आहार की सहायता से कोलेस्ट्रॉल शरीर के भीतर जाता है तो तय सीमा से अधिक होने पर रक्त वाहिकाओं पर दबाव पड़ता है। यही मुख्य कारण हैं कि ह्दय दबाव पड़ने पर रक्त को पंप नहीं कर पाता है और घबराहट, सांस लेने में दिक्कत और हार्टबीट पर नकारात्मक असर पड़ता है।

दालें और फलियां में लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स होता है, जो मधुमेह को नियंत्रित करता है और बीपी को भी कंट्रोल करता है। अब सवाल है कि कौन सी दाल और फलियों का सेवन करना लाभकारी रहेगा। वैसे तो हर दाल के अपने गुण होते हैं, लेकिन हृदय रोग से पीड़ित और बचाव के लिए लोबिया, मसूर, राजमा, मूंग, चने और मोठ की दाल लाभकारी रहती हैं। जीवनशैली में बदलाव करते हुए आहार में सलाद, सूप, दाल, रेशेदार सब्जियां और ब्राउन राइस को जरूर शामिल करें। ब्राउन राइस में कैंसर विरोधी गुण और मौजूद एंटीऑक्सीडेंट मौजूद होते हैं, जो शरीर को कई लाभ देते हैं।

Source: IANS

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