सीबीआई की बड़ी कामयाबी, बैंकिंग धोखाधड़ी में भगोड़ा आरोपी कमलेश पारेख

नई दिल्ली, 2 मई । बैंकिंग और वित्तीय धोखाधड़ी के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के हाथ बड़ी सफलता हाथ लगी है। इस मामले में आरोपी भगोड़े कमलेश पारेख को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से भारत लाया गया है।

1 मई को उसे भारत लाया गया। दिल्ली पहुंचते ही सीबीआई ने उसे हिरासत में ले लिया। सीबीआई ने यह कार्रवाई विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय के साथ मिलकर की।

कमलेश पारेख के खिलाफ इंटरपोल का रेड नोटिस जारी था, जिसके आधार पर उसे यूएई में ढूंढ निकाला गया। भारत के अनुरोध पर वहां की एजेंसियों ने उसे हिरासत में लिया। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने और भारत और यूएई के बीच समन्वय के बाद उसे भारतीय अधिकारियों को सौंप दिया गया।

कमलेश पारेख पर बड़े पैमाने पर बैंकिंग और वित्तीय धोखाधड़ी का आरोप है। इस मामले में देश के कई बैंकों के समूह को, जिसकी अगुवाई स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) कर रहा था, सैकड़ों करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। जांच में सामने आया कि पारेख ने अन्य प्रमोटरों और निदेशकों के साथ मिलकर बैंक के फंड को विदेशों में फैली कंपनियों के जरिए डायवर्ट किया।

बताया गया है कि उसने यूएई समेत अन्य देशों में अपनी कारोबारी गतिविधियों और निर्यात से जुड़े कामकाज के जरिए फर्जी तरीके अपनाए। इसमें वित्तीय लेन-देन में हेरफेर और बैंकिंग चैनलों का गलत इस्तेमाल शामिल था।

सीबीआई (जो भारत में इंटरपोल के लिए नेशनल सेंट्रल ब्यूरो के रूप में काम करती है) 'भारतपोल' प्लेटफॉर्म के जरिए देश की सभी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समन्वय करती है। इसी सहयोग के चलते पिछले कुछ वर्षों में इंटरपोल चैनलों के माध्यम से 150 से ज्यादा वांछित अपराधियों को भारत वापस लाया जा चुका है।

इस ताजा कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एजेंसियों के बीच मजबूत सहयोग का एक और उदाहरण माना जा रहा है।

Source: IANS

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