दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्राओं ने स्लीपर बस गैंगरेप केस के विरोध

नई दिल्ली, 2 सितंबर । उत्तर प्रदेश के मैनपुरी की नाबालिग लड़की के साथ चलती स्लीपर बस में कथित गैंगरेप के विरोध में दिल्ली यूनिवर्सिटी में सैकड़ों छात्राओं ने आधी रात को मार्च किया। एसएफआई ने छात्राओं के लिए घोषणापत्र जारी किया, जिसमें सुरक्षा, प्रतिनिधित्व और लैंगिक न्याय की मांग की गई।

दिल्ली यूनिवर्सिटी के अलग-अलग कॉलेजों की सैकड़ों छात्राएं एसएफआई के 'रीक्लेम द नाइट' मार्च में शामिल हुईं। एसएफआई की एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि छात्राओं ने 16 साल की लड़की के साथ हुए गैंगरेप के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर किया और इस बात पर जोर दिया कि महिलाओं को किसी भी समय सार्वजनिक जगहों पर आजादी से रहने का अधिकार है।

प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस मार्च के दौरान डूसू के लिए एसएफआई का 'छात्रा घोषणापत्र' भी जारी किया गया, जिसमें डूसू चुनाव की चर्चाओं में महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और प्रतिनिधित्व को मुख्य मुद्दा बनाया गया।

घोषणापत्र में डूसू चुनावों में सभी महिला कॉलेजों के लिए वोटिंग के अधिकार और डूसू के पदाधिकारियों के पदों पर महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण की मांग की गई। इसमें भेदभावपूर्ण कर्फ्यू के बिना सुरक्षित और किफायती महिला हॉस्टल, छात्राओं के प्रतिनिधित्व वाली काम करने वाली आईसीसी, आसानी से उपलब्ध मासिक धर्म स्वच्छता सुविधाएं, कैंपस के आसपास मजबूत इमरजेंसी सपोर्ट और महिला पुलिसकर्मी, और मॉरल पुलिसिंग व जेंडर-आधारित उत्पीड़न को खत्म करने की भी मांग की गई है।

घोषणापत्र में महिलाओं के पढ़ाई छोड़ने (ड्रॉपआउट) को रोकने के उपाय, स्कॉलरशिप और फेलोशिप तक बेहतर पहुंच, जेंडर-न्यायपूर्ण पाठ्यक्रम और डीयू कैंपस में नियमित स्वतंत्र सुरक्षा ऑडिट की भी मांग की गई है।

एसएफआई का कहना है कि महिलाओं की सुरक्षा महिलाओं की आजादी की कीमत पर नहीं हो सकती। महिलाओं को अंधेरा होने के बाद घर के अंदर रहने के लिए कहने के बजाय यूनिवर्सिटी और सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि महिलाएं बिना किसी डर के आजादी से पढ़ाई कर सकें, यात्रा कर सकें और सार्वजनिक जगहों पर रह सकें।

Source: IANS

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